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aaj ka bharat

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Wineer of Green Idol Award, 2013 by Dainik Bhaskar Foundation

Wineer of Green Idol Award, 2013 by Dainik Bhaskar Foundation

an Effort Towards Greener World

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गुलामी को सलामी

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राम नाम से तो डर

नाम लेता लगाता संग जिस राम का

उस मर्यादापुरषोतम के नाम से तो डर

द्रोपदी की लाज बचाई जिसने

उस अर्जुनसारथी घनशाम से तो डर

इंसान रूप, मगर मारे डंक है तु

संतो की पावन धरा पे, कलंक है तु

कब्र मे पांव तेरे, दिल मे वासना के डेरे

बापू बना फिरता, आस्था के शाप से तो डर

शाम होने को जिंदगी की तेरी

मौत की काली छावं से तो डर

मिटी ना अब तक तेरी मैं मैं

अहंकारी रावण के अंजाम से तो डर

होता कौन तु भक्तों को ज़न्नत देने वाला

ओ पापी ज़रा जहन्नुम के इंतकाम से तो डर

दुहाई देता फिरे किन शुभकर्मन की तु

अब जरा दुष्कर्म के दुष्परिणाम से  तु डर

बहुत चढ़ ली श्रदा की चोटिया तुने

अब जरा वक्त के उतराव से तु डर  

 

रजनी विजय सिंगला

Email: rajnivijaysingla@gmail.com

 

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कुकर्मी संत की रासलीला

कहाँ मर्यादा पुर्शोतम राम

कहाँ बापू आसाराम

राम नाम को किया बदनाम

रावन से भे बदतर काम

बलात्कार कर सत्संग करे

आत्म आवाज़ को भंग करे

बलात्कार के बाद नातिन कहे

रहें सहे संस्कार वो भे बहे

चेले चपेटे लाखों में

पट्टी बांधें आँखों पे

पापी को बापू कहे नादान भूलो में

बलात्कारी आहंकारी बापू झूलो में

शिकारी बेबस अकेली शूलों में

कानून करे बुलंद आवाज़

बलात्कार से मुक्त करे समाज

शिकार को नहीं शिकारी को मारे

नारी को नहीं बलात्कारी को मारें

रजनी विजय सिंगला

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ज़माना क्या जाने

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Real independence…

“Dosto mere liye aazadi ka matlab sirf yeh nahi hai ki hum aazad ghume, khaye, piye, jhoome, asli aazadi hamare vicharoon ki aazadi, hamari aatam bure karmo se .. Buri soch se aazad tabhi bharat sampurn aazad kehlayega… ” ab bolo jai hind… ”

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हाय रुलाया प्याजों ने

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यह  कैसी आजादी

महंगाई ने की बर्बादी

प्याज आसमान पे पंहुचा

गरीब ने  अपना पेट  नोचा

अमीर भरे lockers में

गरीब रोटी की ठोकरों में

प्याज सोने के भाव हुआ

पेट भरना हराम हुआ

Blackmailers’ का काम हुआ

वतन फिर बदनाम हुआ

मेहमान न आये घर कोई

गरीब करे बस यही दुआ

रजनी विजय सिंगला

Email: rajnivijaysingla@gmail.com

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ज़रूरत किसकी ?

this is an inspirational poetry . .

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राखी आई रे . . फौजी भाई रे . .

राखी आई रे . . राखी आई रे ;

बहनों  ने आवाज़ लगाई  रे . . 

बड़े दिनों के बाद. .  फौजी भाइयों के साथ;

 वतन की खुशबु आई रे . . 

राखी आई रे … राखी आई रे. . .

लौटा जब राखी पर भैया . .

हारे थके न माँ ; ले ले बलैया 

एक नें जन्मा, एक पे वारी ; 

दो मैया भैया है थारी 

धरती माँ कितनी है प्यारी रे 

राखी आई रे… राखी आई रे..

पुनिया टीका लगा दू आ भैया 

कलाई पे प्रेम सजा दू आ भैया 

उपहार में लायी बूटा मै ऐसा 

हरा भरा रहे वतन भे वैसा 

शांति हरयाली में समाई रे 

राखी आई रे.. राखी आई रे..

तोड़ के तु अपनों के सपने 

नाम जिंदगी वतन के अपने 

तुम्हे मुबारक अरदास दुआएं

बुरी नज़र से खुदा बचाए 

सच्चे राखी तो है , फौजी भाई रे 

राखी आई रे . . राखी आई रे. . 

बड़े दिनों के बाद, फौजी भाइयों के साथ 

वतन की खुशबु आई रे .  .  . 

 

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अंगदान दिव्यदान [world organ donation day]

अंगदान : दिव्यदान [world organ donation day]

अंगदानियो की कितनो को ज़रूरत

अंगदान  का बंदे कब होगा मुहूर्त

अंगदान का प्रण तु ले ले

पुण्यकर्म का फल तु ले ले

आत्मा अमर है, यह सच है माना

मौत बाद जिंदगी हसीन तराना

मौत के बाद जो होना राख है

किसी के लिए नूर, जो होना खाक  है

नेक काम में कैसी देरी ?

उजालो से भर दे बेबसी अंधेरी

तेरी नींद किसी की जाग है

अंगदान का संकल्प पाक है

रजनी विजय सिंगला 

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दर्द को दावत

दर्द को दावत

सोचा था हिरोशिमा दिवस पर

शांति के फ़रिश्ते आयेंगे

नामालुम था सरहदों पे मासूम मारे जायंगे

एक ही माँ के दो हिस्से

फिर क्यूं हिंसा के किस्से

बेवजह दोहराये जायंगे

दर्दे बादल आयेंगे

अशांति बरसायंगे

 

रजनी विजय सिंगला

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ताज किसका ?

ताज किसका ?

ताजमहल बनवा इतराते है जो लोग

कारीगरों के हाथ कटवाते है जो लोग

बुलन्दियो पे अपनी इतराते है जो लोग

माटी में इक दिन मिल जाते है वो लोग

बेबसी पे दुसरो की मुस्कराते है जो लोग

अभिमान का लग जाता है उनको रोग

खुदा भी नही खाता रहम उनपे ज़रा भी

खुदा के दर पे रहम को गीड़गीड़ाते है वो लोग

 

रजनी विजय सिंगला 

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IK MORNI ISHKE JUNGLE DI

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GHUNGHAT

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