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Likhna Bha Gaya . . . .

It is my personal poem. It gives an insight of my journey of “kalam aur mai”.

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Posted by on June 16, 2012 in poetry

 

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Corona cage

Corona cage

Kitne pas
Pur
Kitne dur…
Bahut majbur
Kudrat se gustakhi
Ki kur Saza manjoor

 
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Posted by on March 26, 2020 in corona # lockdown

 

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Priyanka Reddy Hydrabad

बेटियां सदा सलामत रहे
बलात्कारी बिल्कुल नही

 
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Posted by on February 29, 2020 in poetry

 

(बिछड़े) कभी न आन मिले!

बरसी मनाके हम तो भूल जायेंगे।

खोने वाले कभी क्या भूल पायेंगे ?

इम्तिहान ऐ जिंदगी जब आजमायेंगे।

कैसे देश गीत ये, कैसे देश प्रीत ये ?

विरासत -सियासत मे , ये पनपायेंगे ?

टूट टूट जायेंगे, ये घुट घुट जायेंगे।

स्मारक -समाधि पे शायद ये आ जायेंगे।

घुटन व टुटन से कैसे रिहाई ये पायेंगे ?

बिछड़े कभी भी नाही आन मिले ।

तिरंगे में लिपटी जब रिश्ते ऐ जान मिले।

इक बार मातमी धुन, सलामी ऐ शान मिले।

हमदर्दी तमग़ा, कभी कुछ कुछ अनुदान मिले

ताउमर उससे कैसे उनका ख़ानदान चले ???

 

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कल्पना ! तेरी शहादत शततनमन

कल्पना ! तेरी शहादत शततनमन
 
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Posted by on February 12, 2020 in Colombia, kalpna chawla, nasa, space

 

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झाड़ू केजरीवाल की सफाईपसंद है

झाड़ू केजरीवाल की सफाईपसंद है

 

अपनों के तीर

अपनों के तीर

अपने जब दरद देते इन्तेहा
पराये तब ये कहते हंसके हम पे
बेहद नाज करते थे तुम जिन पे


आज वही जुबां खामोश रुह घायल
मन का भिगो गये कोना – कोना ।

अश्क छुपाले और छुपाले रोना

किसको दिखायेगा दरद को ढोना ?

 

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शिकार हुआ शिकारा

शिकार हुआ शिकारा
 

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