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Likhna Bha Gaya . . . .

It is my personal poem. It gives an insight of my journey of “kalam aur mai”.

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Posted by on June 16, 2012 in poetry

 

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दुआए काम आयेगी

दुआए काम आयेगी
इरादे करो नेकी का

 
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Posted by on January 21, 2017 in poetry

 

परेशान हूं मैं ?

कोई अपने अहम संग भी खूब मज़े में 

मैं अपने रहम से बड़ा परेशान  हूं।

 
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Posted by on December 19, 2016 in poetry

 

ममता उधार नही मिलती 

यारों में न मिले बाप ,सहेलियां में मां नही मिलती ।

कंही भी ढूंढो पर शांति – ममता उधार नही मिलती ।

वहम-अहम के साये में रिश्तों को पनाह न मिलती ।

झूके पेड़ों को फल बरसाते देखो कभी ,मिले सूकून

 प्यार बांटने के लिए ये जिंदगी बार बार नही मिलती ।

 
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Posted by on December 7, 2016 in poetry

 

वतनपरस्ती के दीवाने

नोटबंदी ने सादगी के दरवाजे खोल  दिये ।

सादा जीवन उच्च विचार कानों में घोल दिये ।

 
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Posted by on December 3, 2016 in poetry

 

कुदरत से कर लो यारी

बेवक्त बेवजह बहता है जब पानी ।

लहूलहुान होती है कुदरत रुहानी ।

लगता है मुझे कुछ -कुछ ऐसे ।

कोस रहा हो कोई प्यासा जैसे ।

करता- कतरा न दो विरासत ।

बचत होती है अच्छा आदत ।

कल के लिए बचा लो पानी ।

जल बिन, नादानों  क्या जिंदगानी  ?

 
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Posted by on December 1, 2016 in poetry

 
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दोस्ताना हमारा कयामत से कयामत तक

 
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Posted by on November 30, 2016 in poetry

 

समझाया किसी ने ।

दरद देने वालों पे क्यूं आता है हमे प्यार ?

समझाया हमे किसी ने इंसानियत यही यार ।

हर मजहब की सीख ये, समय की भी पुकार ।

समझ गया जो , जीता मन , जीता सब संसार

 
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Posted by on November 7, 2016 in poetry

 
 
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