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Fight against Corona

Fight against Corona
Bhaag ja CORONA
 
2 टिप्पणियां

Posted by on अप्रैल 3, 2020 में poetry

 

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Likhna Bha Gaya . . . .

It is my personal poem. It gives an insight of my journey of “kalam aur mai”.

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13 टिप्पणियां

Posted by on जून 16, 2012 में poetry

 

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चैट

गर्दिश का राजा

गर्दिश का राजा

घोड़ा है ना गाड़ी है, ना महल ना चौबारे ना दरबान है ना पकवान है , माई रे ! न हीरे जेवरात है, # Bapu मेरा राजा ना मां मेरी रानी है ,ना सेना है ना मेवा है, काम करती थी जहां मां , ईट बजरी थी वहां, राजगद्दी उसकी बनाकर मुझे बिठा दिया, तंग कर रहा था बहुत इसलिए बहला दिया, गर्दिश के राजा का आसन सजा दिया #माई ने मेरी @ मैया मेरी ने अपने कुंवर का

 
 

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स्थति

Double Decker Sleeper

Double Decker Sleeper

नींद के लिए जरूरत होती है सुकून की ,शांति की, थकान की नाही जरूरत होती है बड़े मकान की, बड़े बेड की , बड़ी राशि की नाही मंदिर मस्जिद काशी की

 
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Posted by on अक्टूबर 20, 2021 में healthy sleep, poetry

 

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Negative bye bye

Negative bye  bye

Negative Aura को मारो धakka
Positive Aura को पा लो जaffa

 
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Posted by on अक्टूबर 18, 2021 में poetry

 

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बेटियां कराएं राज🇮🇳❤

बेटियां कराएं राज🇮🇳❤

एक बेटे से मन ना भर जब ।

दूसरे की चाह मे कर ली आठ ।

हाय ! बेटे ने सिर डाली खाक ।

बेटियों ने दिखाएं खूब ठाठ ।

 
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Posted by on अक्टूबर 18, 2021 में poetry

 

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चैट

जिंदगी जलेबी

जिंदगी जलेबी

जहां जिंदगी की जलेबी हो हां जलेबी कैसे खाएं कौन देखता है हमारी हमारी लार को हमारी मजबूरी को बेबसी को बेकसी को पता है ना भूख का मोल हम चुका नहीं सकते और बिना मूल्य के वह हमारी भूख मिटा नहीं सकते वह भी मजबूर हैं हम भी मजबूर

 

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उलझे सूरत में

सूरत सूरत ही करते रहे

अब समझे मायने सीरत के

रूप रंग की लेते रहे बलाई

मिली उनसे हमे Bewafai

सूरत ने दिखाए दिन में तारे

सीरत वाले क्यों हमने bisare ?

 

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गैलरी

राम चाहिए# राम मंदिर नहीं

राम चाहिए# राम मंदिर नहीं

कलयुग में जगह जगह पर रावण मिल जाएंगे । बलात्कारी, हत्यारा, चोर लूटेरा ,नशे का व्यापारी बन ,कभी दहेज लोभी बन, इन रावण को मारने के लिए बहुत सारे राम चाहिए । राम मंदिर बनाने से कुछ नहीं होगा राम बनने से कुछ होगा ।बन मर्यादा पुरुषोत्तम मार दो सच्चाई के तीर से कुछ तो कम होगा कलयुग ,कुछ तो सुरक्षित रहेगी नारी ,कहीं तो सतयुग का आभास होगा ,कहीं तो रामराज्य नजर आएगा ,ना मंदिर चाहिए ,ना मस्जिद चाहिए ,ना गुरुद्वारे चाहिए ,चाहिए तो राम* चाहिए ,गोविंद चाहिए

 
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Posted by on अक्टूबर 15, 2021 में poetry

 

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दोहे की माला

दोहे की माला

गांव का सरपंच मैं , घर में रहे क्लेश

बांचे दिन रात सत्संग , मन में भरा द्वेष

 
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Posted by on अक्टूबर 12, 2021 में poetry

 

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दोहे की माला

दोहे की माला

कोयल सबकी लाडली काग किसको भाय ? सुन जे बानी दहूं की उत्तर खुद ही मिल जाए ।

 
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Posted by on अक्टूबर 7, 2021 में dohe

 

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Ae parinde kyu nahi aaya?

https://hindipoetryworld.wordpress.com/2015/03/15/ae-parinde/

 
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Posted by on अक्टूबर 6, 2021 में poetry

 

Bachelor and India

This was a big honour for my son poet Bhavya Singla presented own poetry to legend, a poet himself missileman President Abdul kalam ji at his school time at jalandhar. Only child got chance staying with Greatman throughout time he spent in jalandhar who was enjoying bachelorhood with Pm अटल ji during serving nation. Will remain in our hearts these bachelors forever.

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Posted by on अक्टूबर 5, 2021 में poetry

 

जीने का हक

जीने का हक

चाहे तो क्या नहीं कर सकती हैं बेटियां

दामन खुशियों से भर सकती हैं बेटियां

जीने का हक मांगे अपने जन्मदाता से

भाग्य लिखा कर लाती है विधाता से

छोटा सा होता है तमन्नाओं का जहान

देकर सांसों का हक भरने दो उड़ान

 
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Posted by on अक्टूबर 5, 2021 में poetry

 

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Retreat ceremony

Retreat ceremony

https://hindipoetryworld.files.wordpress.com/2019/02/vid-20190226-wa0007.mp4

 
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Posted by on अक्टूबर 4, 2021 में poetry

 

Dosti ka dam

Dosti ka dam

दिल के रिश्ते सदा सच्चे नहीं होते

दोस्ती के रिश्ते कभी कच्चे नहीं होते

 
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Posted by on अक्टूबर 4, 2021 में poetry

 

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सच्चाई @ गांधीवाद

सच्चाई @ गांधीवाद

गांधी तेरे देश में कुर्सी की बस जंग है अपनी अपनी डफली अपने अपने रंग है नोट पर तस्वीर तेरी, दीवानी दुनिया पैसों की, जो राह दिखाई तूने उससे महल बनते नहीं। समझाएं उनको जाकर क्या ? जिनको मदिरा कुर्सी पैसा लगता अच्छा, गांधी जयंती मनाने से कुछ होने वाला नहीं ,जब तक गांधी के आदर्शों का बनेगा रखवाला नहीं ।

 
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Posted by on अक्टूबर 2, 2021 में poetry

 

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जैसा अन्न वैसा मन

जैसा अन्न वैसा मन

काटने से पहले कोई जानवर सोचना जरूर , इसमें भी सांस है , इसको भी आस है , इसको भी प्यास है जीने की, अपनी भूख के लिए किसी मासूम की बलि मत बनाओ । कुदरत ने बहुत दिया है खाने के लिए इंसान की खातिर तो फिर क्यों इंसानियत छोड़ हैवानियत का दामन थामना , क्यों ? किसी को जीते जी अपने क्षणिक स्वाद के लिए जीवन से वंचित कर देना अमानवीय है । तामसी वृत्ति को त्यागना है तो शाकाहार बनाइए क्योंकि कहते हैं (जैसा अन्न वैसा मन )

 

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Tu Hi Tu Tu Hi Tu

Tu Hi Tu Tu Hi Tu
 

World translation day

World translation day

Mother comes before God

मां का स्थान भगवान से भी पहले आता है

 

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ठोके ताली कि दे गाली

ठोके ताली कि दे गाली

असी तां डूबेंगे सनम

तूहान वी लेके डूब्बांगे

कदे तोला कदे माशा

कि लाया ऐ तमाशा

 
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Posted by on सितम्बर 30, 2021 में poetry

 
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भगत सिंह रो पड़ेंगे

भगत सिंह रो पड़ेंगे

देख करअपने वतन का हाल

भगत सिंह को होगा मलाल

ना देता मैं भी कुर्बानी अपनी

ना गंवाता जवानी अपनी

न गाता रंग दे चोला बसंती

वतन की हालत की इतनी गंदी

4 दिन में 4 सवाल

अभी तो थे अमरिंदर जी

नवजोत सिद्दू जी

कभी रंधावा जी

आ गए पर,,,फिर चन्नी जी ,

चार रोज उनकी भी न चलने दी

रोज नए नए बयान चुटकले

नए नए शगूफे

रेगिस्तान में खुशबू सौंधी

किसी को चढ़ा देते हैं

कभी किसी की कुर्सी ओंधी

कभी किल्ली, कभी गिरगिट

कभी चक दे फट्टे

बने चन्नी जब मुख्यमंत्री ?

सिद्धू जी आप ही नठ्ठे

 

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नफरत नर्क है ।

नफरत नर्क है ।

जानते हैं नफरतों से
ही पैदा होते हैं रोग
इतनी नफरतें पालकर
कैसे जी लेते हैं लोग ?
प्यार यार ,हार इंतज़ार
सब्र इकरार, दिल दिलदार
अपना बना कर तो देखिए
करे कैसे जिंदगी चमत्कार !
जरा आजमा के तो देखिए

 

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बेटियां बहार होती है

बेटियां बहार होती है

बेटियां # बहुत जरूरी है #savedaughter ,#save girls.#women empowerment #savegirls https://share.myjosh.in/video/527e8707-d92d-4e4a-acb5-c502586bf745 Download Josh for more videos like this! https://m.myjosh.in/6OaT/6d76ce25

 
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Posted by on सितम्बर 26, 2021 में poetry

 

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स्थति

बेटी भी जरूरी है।

बेटी भी जरूरी है।

बेटियां आंखें ही नहीं रूह भी पढ़ लेती है मुसीबतों को अपने हौसलों से गढ़ देती है सींचते – पलते बेटे बेटियों से भी ज्यादा फिर क्यूं बेटे दे दर्द ? बेटियां बने हमदर्द क्यूं हमेशा दवा बन जाती है ?

 
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Posted by on सितम्बर 26, 2021 में Happy daughter's day, poetry

 

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चाय का अमल

चाय  का अमल

मम्मी हमेशा दूध देती है

अच्छी लगती है पर चाय

संग होते बिस्कुट रस

मजा आ जाता है हाय

मम्मी आती अचानक जब

घबरा जाती है दादी तब

पकड़ा देती दूध का गिलास

छुपा देती , दादी ,चाय तब

मम्मी को पता ही नहीं चलता

मैं और दादी चाय पीते हैं कब ?

 
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Posted by on सितम्बर 25, 2021 में # parle ji biscuit, #kids corner, poetry

 

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VIDAI SHIKSHA….

VIDAI SHIKSHA….

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यार या चाय

यार या चाय

चाय की तलब

इश्क ऐ तलब

से कम तो नही

यार जाए तो जाये

रहे चाय का प्याला

फिर कोई गम नही

 
टिप्पणी बन्द यार या चाय में

Posted by on सितम्बर 21, 2021 में national Chai day

 

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टिप्पणी बन्द Connect with Rajni Vijay singla on Nojoto ❤https://nojoto.page.link/EbUJInstall Nojoto | Free App 😍बोलो अपने दिल की बात 👇👇👇5,000,000+ कहानियाँ, कवितायेँ, अनुभव, रायIndia’s Number 1 Appwritersofinstagram #writeraofindia #shayaris #poetry #quote #wordporn #qotd #igwriters #Nojoto #NojotoApp #wordgasm #wordporn #indianwriters #poetsofindia #stories #storytelling #quoteoftheday #writersofindia #poetrycommunity #igpoets #wordsofwisdom #love #thoughts #igwriterclub में

Posted by on सितम्बर 15, 2021 में poetry

 

हिंद हिंदी हिंदुस्तान

https://nojoto.page.link/R12r

 
टिप्पणी बन्द हिंद हिंदी हिंदुस्तान में

Posted by on सितम्बर 15, 2021 में poetry

 

तन्हाई को तमाचा

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टिप्पणी बन्द तन्हाई को तमाचा में

Posted by on सितम्बर 8, 2021 में poetry

 
स्थति

इन्तजार

इन्तजार

जज्बाते छुअन ने गजल भर दी
नजर कर ले शायद वो बेदर्द
इसी आस मे उम्र बसर कर दी

 
टिप्पणी बन्द इन्तजार में

Posted by on सितम्बर 7, 2021 में शेरो शायरी

 

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सोने की चिड़िया मेरा वतन

https://hindipoetryworld.wordpress.com/2021/08/08/golden-mam-of-golden-sparrow/

 
टिप्पणी बन्द सोने की चिड़िया मेरा वतन में

Posted by on अगस्त 31, 2021 में poetry

 

माखनचोर मन भी चुराता है

माखनचोर मन भी चुराता है

माखन चुरा के खाने में मजा ही कुछ और है.. मुझे तो दिल भी चुराना आता ..आज के दिन तो देवकी मां की कोख से जन्म लिया कंस मामा से बचा ..बाबा मुझे सिर पर .यमुना नदी पार कर ..नंद बाबा यशोदा मैया के में दिल के आंगन में छोड़ आए …प्यार के खजानो में.. ग्वालन को खूब बनाना लुभाना आता है ..मुझे तो राधा को बनाना आता है ..मुझे तो गोपियों को बहलाना आता है.. मुझे तो रास रचाना भी आता है ..मुझे तो श्लोक सुनाना भी आता है.. मैं तो राधा का भी.. मीरा का भी. सुदामा का भी ..अर्जुन का भी .द्रोपदी का भी..गवालों का भी .. मुझे तो बंसी बजाने में और गईया चराने में बहुत मजा आता है ..कभी फुर्सत मिले तो आना .. यमुना के किनारे सुनाऊंगा.. बंसी आपको….

 
टिप्पणी बन्द माखनचोर मन भी चुराता है में

Posted by on अगस्त 30, 2021 में poetry

 

Maa Mai aur Bitiya

Maa Mai aur Bitiya

 

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खेल ही जुनून हो

खेल ही जुनून हो

ना ही लिंग भेद हो

ना ही जात पात हो

ना हो सरहदों की बंदिश

खेल का जुनून हो बस

खेल की ही बात हो

 
टिप्पणी बन्द खेल ही जुनून हो में

Posted by on अगस्त 28, 2021 में jain, Olympic Neeraj Chopra controversy on Neeraj Chopra Chopra, poetry

 

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स्थति

इंसान हूं फरिश्ता नहीं

इंसान हूं फरिश्ता नहीं

मैं कोई फरिश्ता तो नहीं ..जो गलती से रिश्ता ही ना हो .कभी गफलत . कभी शक कभी शरारत कभी …..गिला कभी शिकवा कभी ..प्यार कभी नफरत कभी …रूठना कभी मनाना कभी.. बेकरारी की हद…. सुकून का जुनून कभी..बचपना कभी . जवानी की दीवानगी कभी … बुढ़ापा बनी मजबूरी ..जो भी है इंसान बने रहना है जरूरी क्योंकि इस पर इंसानियत टिकी हुई है वरना वक्त से पहले ही क्यामत आ जाएगी जनाब !

 
टिप्पणी बन्द इंसान हूं फरिश्ता नहीं में

Posted by on अगस्त 26, 2021 में poetry

 

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स्थति

जीते जी मना लो

जीते जी मना लो

आज होते अब नाराज़ जो
पुछे न जब दिलेराज जो
हो जाते जब उनसे जुदा
बुला लेता जब उन्हें खुदा
Miss you miss you कह
सितारों मे ढुंढा करते है ?

जाने के बाद नहीं बच्चों

जीते जी जन्नत बनाओ





 
टिप्पणी बन्द जीते जी मना लो में

Posted by on अगस्त 26, 2021 में रूठे को मना लो, poetry

 

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बरकत खुशियां लाती राखी

हर मायके में बरकत ….
खुशी रहमत लाती राखी…
मायके की रौनक बढ़ाने..
मां के दिल को रोशन करने …पापा की लाडो …भाभी के ननदिया …
दुआओं को …स्नेह के धागों में पिरोकर लाती है बेटियां … होती है पराई बेटियां फिर भी .. हर दिल में समाई है बेटियां…

 
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Posted by on अगस्त 25, 2021 में poetry

 

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मेरा कल्पना संंसार

मेरा कल्पना संंसार

 
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Posted by on अगस्त 25, 2021 में poetry

 

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Crown of nature

Crown of nature

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Trees are the essence of life

We can say them Nature’s wife

Protect them from presence of Knife

Trees are beautiful creature

Green dresses of lovely nature

Purify the breathing air

To cut them is not fair

Dewdrops look like pearls

Jewels of like pretty girls

Trees are the holy kings

Bird’s temple to spread wings

Trees have so many roles

Offer shelter in their holes

Trees are beautiful actors

Impart beauty, herbs & nectar

Trees how much you care

Offer so many daily wares

Not only give they shade

Also offer many trades

Trees provide fruits ripe

Without trees no life

Trees have all noble aims

No word in dictionary to praise

Not selfish, not want fame

Giveness is the only aim

For monkeys a sport device

Funny jumps look very nice

More trees more rain

A good rain brings more grain

Make country wealthy queen

Oblige them making surroundings green.

 

RAJNI VIJAY SINGLA

e-mail:rajnivijaysingla@gmail.com

 
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Posted by on अगस्त 25, 2021 में poetry, trees 🌳 give life

 

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उद्धरण
SAve daughters save trees

bitiya mubarak… Khusiyaan mubarak.. Beti ko Maa k kokh mubarak.. Chidiyaan ko ped k chhaoon mubarak.. Happy daughter’s day to all.

Posted from WordPress for BlackBerry.

SAve daughters save trees

 
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Posted by on अगस्त 25, 2021 में poetry, trees versus girls

 

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Paryavaran ki Pukar…

Paryavaran ki Pukar…

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Why trees less than people?

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टिप्पणी बन्द Why trees less than people? में

Posted by on अगस्त 25, 2021 में poetry

 

सोने की चिड़िया मेरा वतन

सोने की चिड़िया मेरा वतन

ना ही लिंग-भेद था

ना ही मजहब जात थी

खेल का जुनून था बस

मंजिलों की बात थी

गुरुओं की चाह ने

मेहनत की पनाह में

जीत की दरकार थी

दुआओं की पुकार थी

मां भारती गदगद महक उठी

ताज पर सोना जब चढ़ा

मिल्खा सिंह की तमन्ना को

नीरज ने हकीकत में जब जड़ा

तिरंगे का वह झूमना

तमगों को वह चूमना

आनंद सुकून आ गया

हर्षनाद छा गया

जब बजा राष्ट्रगान

हुआ हर्षित हिंदुस्तान

वतन के गबरु मूटीआरों ने

एलपीयू के होनहारो ने

सपने साकार कर दिए

खेल जगत नगरी में

चार चांद जड़ दिए

चुमेंगे जब वे सरजमी

फक्र की होगी अश्के नमी

बहुत आगे जाना है

स्वतंत्र दिवस का है आगाज

तोहफे पे बड़ा है नाज

जोश ऐ हिंद बढ़ाना है

मां भारती के ताज में

और रतन चढ़ाना है

चढ़ाते ही जाना है

जय हिंद जय हिंद गुंजाना है

 
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Posted by on अगस्त 8, 2021 में Olympic tokyo, poetry

 

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वक्त ही पूर्ण गुरु

वक्त से बड़ा गुरु हो ही नहीं सकता. वक्त के पांव नहीं होते मगर ना जाने कब दबे दबे पांव हमारे पास आकर खड़ा हो जाता है. जैसे घुमाना चाहे घुमाता है ..वक्त की ठोकरे ..वक्त की ( ठोकरे .. आंधी . बहाव )जितना हमें सिखा सकता है सिखा जाता है.. बिना गुरु दक्षिणा लिए.. बिना प्रसाद दिए .. वक्त ही पहचान गवाता .. वक्त ही पहचान दिलाता मेरा परम गुरु तो भगवान है उसकी दिखाई दिशा में वक्त जो सिखाता चला जाता है वही मेरा ( गुरु मंत्र ) है वक्त की मेहरबानी ही नैया पार लगाती है गुरु नहीं ..वक्त ही मझधार में ले जाता है वक्त ही जमीन पर .. वक्त ही आसमान में उड़ाता है ..मत भाग नादान बंदे उन शैतान गुरु के पीछे पीछे जिनकी शैतानी ..बदनियत और हैवानियत ने श्री गुरु शब्द को ही शर्मसार कर दिया

 

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फलों का राजा परियों की रानी

 
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Posted by on जून 30, 2021 में poetry

 

करोना है चला जाएगा

गोल गोल गप्पा की बिक्री भी थोड़ी बंद
औरतों की खरीदारी भी हो गई मं हैरोना का बाजार तो पूरा गर्म है .
ब्लैकमेलर की आत्मा बिक रही बाजारों में

.बना रहे हैं महल मरीजों की मजारों पे

कलयुग से से भी काला आज का दौर है .. इंसानियत सुबक रही किसी कोने में.

. हैवानियत का पूरा जोर है.. रिश्तो को कुचलकर मतलब परस्ती की दौड़ है

 
टिप्पणी बन्द करोना है चला जाएगा में

Posted by on जून 24, 2021 में poetry

 
स्थति

बागबान तेरा

बागबान तेरा

सीचने वाले को थोड़ी सी…
छाया का हक दे देना
आंखों को पढ़ना सीख लेना…
पड़े ना उनको कुछ कहना
आंसू बहे भी तो खूब हंसने पर
यूं ना देना कभी भी बहना
हर बात मानना जरूरी नहीं
कभी मान लेना थोड़ा सा कहना

 
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Posted by on जून 24, 2021 में poetry

 

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स्थति

नजर अपनी-अपनी

सूरत से धोखा खाने वाले आज भी( सूरत )की तलाश में
हम खुशनसीब ही बड़े… हम अच्छी (सीरत ) के पास में

 
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Posted by on जून 24, 2021 में poetry

 

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बेटियों का क्या कहना

जानते है बेटियां पराई होती है


फिर भी दिलोजां में समाई होती है


अपनेपन की ये मिठाई होती है

हर दर्द की दवाई होती है

बिन कहे जान जाती

है वह बात दर्दे राज

जो लाख हमने छुपाई होती है

 
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Posted by on जून 15, 2021 में poetry

 

अमंगलकारी करोना

अमंगलकारी करोना

कुछ कुछ तो काट डाले कुछ …डाले जला… कुछ पर कब्जा कर लिया कंक्रीट के जाल ने… छोड़ना पड़ा पंछियों को आशियाना अपना… बहुत विलाप किया पेड़ की डाल ने…. बांट रहा ऑक्सीजन लेकर हमारी कार्बन… इंतहा हो गई जब सितम की हमारी तो …छोड़ दिया कुदरत ने हमको हमारे हाल पर… तभी तो पुकार रहा है सारा जहां (ऑक्सीजन ऑक्सीजन ऑक्सीजन ऑक्सीजन ऑक्सीजन) कहां से मिल जाएगी जब ..जब जड़ ही नहीं रहेगी …पेड़ पौधे कैसे कैसे वजूद बचाएंगे अपना ..जंगलों का.. जंगल में मंगल मंगल का ..जंगल में अमंगल है परिंदे बड़ा रोते हैं दमनकारी जानलेवा महामारी.. अमंगल कारी करोना .दुनिया वालों ने खुद ही खुद ही कहलवाया “”जंगल जंगल जंगल बात चली है …. अमंगल हो रहा है धरती पर “”

 
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Posted by on मई 31, 2021 में #covid, poetry

 

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चाय की चुस्कियां

चाय की चुस्की चुस्की और गपशप मजा आ जाता है यार

चाय की चुस्कियां
 
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Posted by on मई 28, 2021 में poetry

 

चाय की चुस्कियां

चाय की चुस्कियां

चाय की चुस्की.. चाय का ठेला चाय का मसाला चाय की तलब चाय का अमल चाय नाश्ता चाय की कैंटीन कैंटीन में बातें दोस्त पहेलियां सहेलियां चाय पकौड़े बारिश का मौसम चाय का पतीला morning tea evening tea high tea चाय चाय चाय चाय का बुलावा talk shalk snacks wnaks चाय का जाएका चाय ka भाव चाय बेचने वाला प्रधानमंत्री चाय के बागान darjlleng aasam tea pickers चाय की प्याली चाय का दाग चाय की ट्रे स्टेशन बस स्टैंड चाय चाय गरमा गरम चाय चाय तो हमारी संस्कृति में हमारे देश में हमारे गांव में हमारे घरों में घुल मिल गई है जैसे जैसे इसके बिना हमारा वजूद ही नहीं …चाय के साथ सुबह शुरू होती है चाय की कहानी कितने भी लंबी कर लो सारे हर राह हर एक की चाह चाय बन गई बच्चे जिद करते हैं दूध नहीं चाय पी लूंगा बहुत होगी लंबी चाय तेरी दास्तान मुझे तो खुद चाय की तलब हो रही है coming back after tea break

 
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Posted by on मई 23, 2021 में poetry

 

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आ गया मन में

गुनाह और दुआ साथ नहीं चल सकते अंधेरे और रोशनी की तरह जैसे जमीन और आसमान मिल नहीं सकते बारिश की बूंदों के बिन….

 
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Posted by on मई 18, 2021 में akshay kumar, poetry

 

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कुछ तो इंसानियत दिखा

कुछ तो इंसानियत दिखा

कल किसका कोई नही जानता
फिर क्यूं दरदे तीर है तानता ?

सांसे है अटकी करोना खंजर पर

हैरान हूं फिर भी हैवानियत मंजर पर

कर्मों से ज्यादा पैसों के हिसाब किताब में

क्या लिखा रहा धर्मराज की किताब में..?

 
टिप्पणी बन्द कुछ तो इंसानियत दिखा में

Posted by on मई 17, 2021 में poetry

 

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स्थति

आस्था का समंदर

तेरी नजर में मेरा गणेश एक पत्थर है मेरी नजर में एक वही तो है जो मेरी सुनता है जो मेरे दर्द को जानता है कि क्या करना है कैसे खुश करना है अपने भगत को उसकी गहराई को उसके विश्वास को श्रद्धा को आस्था को टूटने नहीं देना समंदर अपनी मर्यादा छोड़ सकता है मगर आस्था नहीं क्योंकि आस्था विश्वास की बूंदों से बना वह समंदर है वह जिसमें से जितनी मर्जी गोते लगाओ हाथ में खजाने की खजाने आएंगे

 
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Posted by on मई 14, 2021 में poetry

 

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तेरा ही बंदा हूं

तेरा ही बंदा हूं

तेरी याद ..हमेशा फरियाद नहीं होती.. इंसानियत भी होती है.. कभी दुआ भी होती है कभी वफ़ा भी होती है ..कभी दीदार ए तमन्ना भी ..दिलदार बनाने को मन करता है कभी यार कभी अल्लाह.. कभी खुदा…. कभी परवरदिगार कभी वाहेगुरु ..कभी यीशु ..कभी सखा कहने को भी दिल करता है ..कभी मन करता है तू मुझे नजर आए मैं तुझे.. हमेशा झोली अपनी ख्वाहिशों के लिए .. नहीं फैलाता. दूजो पर करम .दुआ कबूल कर ले ..यह भी ख्वाहिश तमन्ना होती है

 
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Posted by on मई 14, 2021 में poetry

 

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अमृत बूंदों की जरूरत

अमृत बूंदों की जरूरत

दो बूंद जिंदगी की …पोलियो ड्रॉप्स की तरह अगर कोरोना वैक्सीन घर घर पहुंच जाए तो करोना मुक्त भारत जल्द ही होगा ..

 
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Posted by on मई 14, 2021 में Corona vaccines

 

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मदर डे

मदर डे
 
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Posted by on मई 9, 2021 में poetry

 

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दो दुआ लो दुआ

दुआए लेना ही जरा मुशिकल होता है ।
बददुआऐ बुरे लोगो को खुद शिकंजे में…..

 
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Posted by on मई 9, 2021 में poetry

 

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