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Likhna Bha Gaya . . . .

It is my personal poem. It gives an insight of my journey of “kalam aur mai”.

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Posted by on June 16, 2012 in poetry

 

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Posted by on July 7, 2017 in poetry

 

Teri Nazar Noorani

 
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Posted by on June 22, 2017 in poetry

 

मान जाओ +मना लो

गलतफहमी को  fiss करो ।

अपनों को   थोड़ा miss करो ।

अपनेपन को  जरा kiss करो ।

Happy Healthy wish करो ।

 
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Posted by on April 6, 2017 in poetry

 

दुआए काम आयेगी

दुआए काम आयेगी
इरादे करो नेकी का

 
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Posted by on January 21, 2017 in poetry

 

परेशान हूं मैं ?

कोई अपने अहम संग भी खूब मज़े में 

मैं अपने रहम से बड़ा परेशान  हूं।

 
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Posted by on December 19, 2016 in poetry

 

ममता उधार नही मिलती 

यारों में न मिले बाप ,सहेलियां में मां नही मिलती ।

कंही भी ढूंढो पर शांति – ममता उधार नही मिलती ।

वहम-अहम के साये में रिश्तों को पनाह न मिलती ।

झूके पेड़ों को फल बरसाते देखो कभी ,मिले सूकून

 प्यार बांटने के लिए ये जिंदगी बार बार नही मिलती ।

 
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Posted by on December 7, 2016 in poetry

 

वतनपरस्ती के दीवाने

नोटबंदी ने सादगी के दरवाजे खोल  दिये ।

सादा जीवन उच्च विचार कानों में घोल दिये ।

 
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Posted by on December 3, 2016 in poetry

 
 
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