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Fight against Corona

Fight against Corona
Bhaag ja CORONA
 
2 टिप्पणियां

Posted by on अप्रैल 3, 2020 में poetry

 

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Likhna Bha Gaya . . . .

It is my personal poem. It gives an insight of my journey of “kalam aur mai”.

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14 टिप्पणियां

Posted by on जून 16, 2012 में poetry

 

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दुआएं लो

दुआए लेना ही जरा मुशिकल होता है ।
बददुआऐ बुरे लोगो को खुद शिकंजे में…..

 
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Posted by on मई 16, 2022 में poetry

 
चैट

दर्द दिया दर्द लिया

दर्द दिया दर्द लिया

गुजारे जो हमारे बिन तुमने 2 साल

बार-बार रोता होगा तेरा मन

कांपता होगा तेरा तन , 3 बेटों के होते ?

जिंदगी मजबूर बेबस और बेहाल है

कितना डर लगता होगा , सर्द अंधेरी रातों में

कितनी बददुआएं दी होंगी उन हालातों में

आपकी जिद थी कि हम मनाए

हम सोचे थे , आप खुद ही आ जाएं

बड़ा भारी पड़ा आपको ना मनाना

बच्चों की दादी ( माँ जी ) सासु माँ

जितना दिया था दर्द उससे ज्यादा पाया

स्वर्ग नरक यही , बखूबी समझ आया

दर्द के बदले दर्द ही पाना पड़ता है

वक्त चला गया पछतावे रह गए

रह गई आपकी माला लगी तस्वीर
पर अब पछताए होत क्या

जब चिड़िया चुग गई खेत

होते अगर इस जहान में तो

कर लेते प्रायश्चित और खेद
खुद गवाह और खुदा गवाह हैं

चाह के भी आपको बुला ना सके

बनता था जो फर्ज हम निभा ना सके

हो सके तो माफ कर देना मां

कर्मगति ने तो कर दिया हिसाब

हो सके तो आप भी साफ कर देना

 
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Posted by on मई 13, 2022 में # MeeToo, poetry

 

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सोचा कभी ?

सोचा कभी ?

मां का बखान तो खुद खुदा भी नहीं कर सकता हम तो फिर इंसान हैं ..मां तो आखरी सांस तक ममता नहीं छोड़ती ..तो मां को प्यार दिखाने के लिए एक ही दिन क्यूं ? कभी सोचा है ? नहीं सोचा …
तो अब सोचो …

 
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Posted by on मई 8, 2022 में poetry

 
स्थति

क्या समझाएं ?

क्या समझाएं ?

क्या समझाएं ?

कैसे समझाएं ?

नादान जमाने को

बुरे तुम नहीं, ए जमाने वालों !

वक्त बुरा है हमारा

कोई पिछले कर्म बुरे होंगे

बेवजह दर्द नहीं मिलता

 
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Posted by on अप्रैल 17, 2022 में poetry

 

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स्थति

डर सच्चा है

डर सच्चा है

धोखा खाया है इस कदर रिश्तो से

डर लगने लगा है अब तो फरिश्तों से

 
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Posted by on अप्रैल 16, 2022 में fear break 💔, poetry

 

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चैट

मां की गुहार

मां की गुहार

मैया तू भी मां , मैं भी मां

एक मां ही मां की जाने रे

ममता जब पीड़ा में होती है

कर मैया संहार पीड़ा का तू

तेरे बिन दाती कहां ठिकाने रे

एक मां की अर्ज मैया से

लगाते अर्जी गुजरे जमाने रे

 
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Posted by on अप्रैल 3, 2022 में poetry

 

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उद्धरण
दिल की कलम#3

सूरत चले जवानी तक सीरत चले बाद भी ।

मोम सा दिल बना ले याद रखें फौलाद भी ।

दिल की कलम#3

 
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Posted by on मार्च 31, 2022 में poetry

 

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दिल की कलम # 2

दिल की कलम # 2

जिंदगी ए जिंदगी !
जिंदगी ओ जिंदगी !
कुछ सुहाने पल मांगे हम तुमसे ।
कल किसने देखा ? आज ही मांगे तुमसे ।

 
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Posted by on मार्च 30, 2022 में poetry

 

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उद्धरण

इतनी मचल गई आज हसरतें ।
अश्क ऐ सैलाब बन बहने लगी ।

दिल की कलम # 1

 
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Posted by on मार्च 29, 2022 में poetry

 

एक जुनून बस @आजादी

एक जुनून बस @आजादी

वतन को सोचे ,वतन ही खोजें ..

वतन ही अपना , वतन ही सपना ….

वतन ही ममता ,वतन ही आशिक।

वतन ही रब ,वतन ही सब ।

वतन दीवाने , वतन से शादी ,

मौत का सेहरा सर पर बांधे

एक ही मंजिल वतन आजादी

बसंती चोला गूंज कण कण में बसा दी

किसी का लाल गोपाल , राखी, किसी का सिंदूर।

एक ही रिश्ता वतनपरस्ती ,नशा, गरूर।

आजादी की अलख जगा दी हजूर ।

हंसते-हंसते जान गवा दी ।

आजाद हिंद का बोया बीज ।

कुर्बानी के लहू से दिया सींच ।

शहादत की मिट्टी पर आजादी का बूटा ।

एक सच* आजादी * बाकी सब झूठा झूठा ।

शहीदो को रजनी का कोटि-कोटि नमन !

जिनके सदके आजाद हिंद ,आजाद चमन ।

 
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Posted by on मार्च 28, 2022 में poetry

 

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सदर कैंट जालंधर से संसद तक

सदर कैंट जालंधर से संसद तक

नाम होते हैं व्यक्तित्व के आईने

नाम से ही हम जाते पहचाने

कुछ सोचकर ही नाना जी ने

मामा आपको नाम अशोक दिया होगा ।

कहीं ना कहीं नाना को भी एहसास होगा ।

अशोक चिन्ह की दीवारों गलियारो पर ।

अशोक का कभी न कभी तो वास होगा ।

यूं ही नहीं सदर कैंट से संसद तक जाता कोई

यूं ही नहीं वतन को भाता कोई ।

मेहनत संघर्ष के अंगारों पर चलना पड़ता है ।

सीढ़ी सीढ़ी मंजिलों की ओर कदम बढ़ाना पड़ता है।

बहुत अच्छा लग रहा है मिल रही बधाईया*

बधाई पात्र तो बड़े नाना नानी है ।

लवली के आकाश का वह सितारा है ।

जिसकी रोशनी से फैला उजियारा है ।

सीखे कोई फन मामा ,आपसे मंजिले पाने का ।

शुक्रिया ए खुदा ! ऐसा गौरव दिलाने का ।

जय हिंद ,जय भारती ,जय गणराज्य ।

 
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Posted by on मार्च 26, 2022 में poetry

 

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जल की आवाज

जल की आवाज

मेरी आवाज सुनो

ऐसा अंदाज चुनो

जल बचाओ ॰॰जल बचाओ ॰॰

पुकारने से ना होगा कुछ

मुझे संभालने से ही होगा कुछ

जीने के लिए जरूरी हूं

प्यास बुझाता मैं पूरी हूं

मुझे जाया करके, नादानो !

खुद ही उजड़ जाओगे।

ढूंढे भी ना मिलूंगा मैं ।

बूंद बूंद को तरस जाओगे ।

अभी भी संभल ले, जमाने !

कसम ले मुझे बचाने की।

[विश्व जल दिवस उत्सव] बस

इक कोशिश सोये को जगाने की।

 
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Posted by on मार्च 22, 2022 में poetry

 

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World poetry (कविता) day

World poetry (कविता) day

जब बरसो की पीड़ा ,मन की घुटन ,बचपन की शरारत ,भूख , मजबूरी के तमाशे, दबी हुई सिसकियां ,ठहरे हुए अश्क, कुछ पहेलियां ,कुछ सहेलियां ,कुछ कुछ छूटे हुए साथी, वह किताबें ,वह पाठशाला ,वह कॉलेज ,वह गपशप , बेबसी ,बदहाली बेरोजगारी बेचारापन, कुछ खट्टी कुछ मीठी यादें ,कुछ ठहरे हुए पल, कुछ रूठे हुए सपने ,रूहे दरवाजे पर दस्तक देते हैं ,ना जाने कब ? कलम उठ जाती है और भर डालती है पन्ने पर पन्ने ,पन्ने पर पन्ने ,कितने ही कविताएं बन जाती हैं ,जज्बात को अल्फाजों में पिरो ,कभी ग़ज़ल, कभी गीत ,कभी कव्वाली ,कभी सूफी ,कभी शेर ,कभी व्यंग्य ,ना जाने कब किताब बन जाती है ! यह लिखने वाले को भी नहीं पता चलता, अगर इसी का नाम कविता है तो हां मैं कविता लिखती हूं, लिखती रहूंगी ::;;;;???+×!

 

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# kashmir files

# kashmir files

ताउम्र घूमती रही हंसी नजारों की तलाश में ..

देख के नजारे पर नैन मेरे भर गये ….

दहशतगर्दी के अंगारे  रूह घायल कर गये 

जन्नत ऐ कश्मीर जेहाद की फांस  में

झुक रहे हैं चिनार पंडित परिवार की आस में

हिंदू  मुस्लिम सिख फिर  से भाई , प्रयास  में 

शांति के गीत गाए फिर से बहारें

फिर से लौट आए बेघर, हारे, बेचारे

जलता जहन्नुम फिर से जन्नत बन जाए।

प्यार की तलाश में , इकरार की तलाश में

अमन की तलाश में, चैन की तलाश में

तलाश में तलाश में *इन्सान की तलाश में ।

गुमशुदा – गमगीन नई पहचान की तलाश में ।

 
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Posted by on मार्च 21, 2022 में # kashmiri files, poetry

 

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Maa Mai aur Bitiya

Maa Mai aur Bitiya

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# रूहें ज़ज्बात

# रूहें ज़ज्बात

रूह है तो जज्बात है ।
ज़ज्बात है तो अल्फाज है ।
अल्फाज है तो आवाज है ।
आवाज भी तो अंदाज है ।

 

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महान नारी मां दुर्गा हमारी

 
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Posted by on मार्च 9, 2022 में poetry

 

holi humjoli

https://wp.me/p2ov1Y-fx

 
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Posted by on मार्च 8, 2022 में poetry

 

महा शक्ति महा नारी मां दुर्गे

महा शक्ति महा नारी मां दुर्गे

भर दे रे मां शक्ति भर दे

तू ही युक्ति , शक्ति  , भक्ति

तेरे बिन मैं हूं अधूरी

तू तो करती आस पूरी

तू आस है विश्वास है

तू आदि अनंत अपार है

तेरी महिमा अपरंपार है

मैं भी नारी तू भी नारी

मन्नत मांगे  नारी संसार

सबको रहमत बरकत दे

हर नारी को शक्ति दे

कोई महिषासुर छू नहीं  पाए

तेरे गुण से खुद को सजाये नारी

हर बार जीते खुशी की पारी

नारी का शौर्य गान विश्व गाये

हर दिन नारी दिवस मनाए

 
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Posted by on मार्च 8, 2022 में poetry

 

सुन सुन सुन बधाई की धुन

गणपति विराजो , लक्ष्मी जी जी भी लाना है ।

मैया आई छम छम टीका लाई दमदम ।

चुनरी लाई चमचम समधन को सजाना है ।

सज धज के समधी जी को रिझाना है ।

सलामत रहे जोड़ी गौरी शंकर कहलाना है ।

भूली बेटी हमको , जब से पाया तुमको ।

धन्य हुए पाकर , पावन आप का घराना है ।

हर दिन होली हो, हर रात जगमगाना है ।

हंसते – बसते रहो , दुआओं का खजाना है।

 

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थाम ले ज़मी! खुदा #

थाम ले ज़मी! खुदा #

ऐ आसमाँ वाले ! दुनिया के रखवाले !
थामे है जैसे सूरज चांद तारे ।
थाम ले , ऐसे ही हमारी ज़मी* को ।
अमन चैन का ( शंखनाद ) हो ।
ना विलाप ना ही विषाद हो ।
शांति प्रेम हो धर्म सबका ।
दिल से दिल का रिश्ता हो ।
इंसान निभाये इंसानियत बस
हर मोड़ पे# दिव्य फ़रिश्ता हो ।

 
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Posted by on फ़रवरी 28, 2022 में poetry

 

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स्थति

अमन से चमन है

अमन से चमन है

जंग तो जंग है इधर या उधर है ।

ढेर पड़े लाशों के खून का सैलाब है ।

बेबसी, तन्हाई ,विलाप चारों ओर

हैवानियत, बेबसी  का जोर है

जीतकर सरहदे…..

क्या पा लेगा इंसान तू ?

सब इधर  ही छूट जाना है

इंसान है तो इंसान बन

मेहरबान – मेहरबान बन

न  हैवान बन, ना शैतान बन

जाना है जो साथ

उससे तू अंजाना है

रहम कर , नादान तू

हैवान से बन इंसान तू

सीमाएं जीतने से बेहतर है

तू जीत  , भुला  रंजिशें

प्यार से सब के गले  मिल

अमन में ही चैन है

अमन का संदेश दे

अमन का  दे परिचय

अमन से ही जिंदगी

अमन से ही बहार है

बाकी सब झूठ है

सच सच केवल ( प्यार ) है ।

 

तेरी मुस्कान मेरा अरमान

तेरी मुस्कान मेरा अरमान

यूं ही मुस्कुराती रहे सदा !

मुस्कुराना भी है मासूम अदा !

तेरी हंसी मेरी जिंदगी है ,

मेरी आरजू है, मेरा अरमान है

जैसे हर मां का होता है

इतना हंसाए जिंदगी

इतना दुलारे बहारें

कभी आंसू भी आएं

तो हंसी के आए खुशी के

आंखें भरे यार ऐ प्यार से

तेरा तन मन महके

छलके-छलके तेरी आंखों से

मेरी लाडो! बिटिया रे # गुड़िया री

@रहमत #नजाकत #बरकत #

#प्यार *ममता # इंसानियत हमेशा ही

 

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प्यार मिले नसीबो से

प्यार मिले नसीबो से

बिना बंधन, बिना चाह, बिना आह निभाएंगे (मोहब्बत) , है वादा खुद से उन्हें चाहने का , ना वादा मांगा हमने उनसे मोहब्बत निभाने का ,ना तुम्हारे प्यार की चाहत है ..इंतजार में..जुदाई में भी एक अलग ही मजा .. ना ही तुम्हारे दीदार की . इकरार की. पुकार की… दिल कहता है… चाहे जा..चाहे जा .. चाहे जा ,चाहे जा, चाहे जा , जरूरी नहीं दिल दूसरी और भी धड़कता हो , पर हमारी तो हर धड़कन में ,हर सांस में तुम ही हो तुम हो , तुम हो.. तुम हो.. तुम हो ..

 
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Posted by on फ़रवरी 15, 2022 में poetry

 

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उद्धरण
Valentine’s Valuation

Valentine not celebration

Show-off of heavy gifts

Valentine ….value of love

valuable partener no gifts

chocolate of sweetness

soul to soul kisses

Valentine dinner (soul food )

valentine =purposal of truth

valentine hugs of care

Valentine 🧸 like softness

Valentine 🌹 in pain -gain

💯% 👬each other forever ..

Valentine’s Valuation

 
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Posted by on फ़रवरी 13, 2022 में 💝 valentine, poetry

 

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valentine thought

valentine thought

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2 टिप्पणियां

Posted by on फ़रवरी 13, 2022 में poetry

 

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आज कलम चली

आज कलम चली

आज कलम चली बहुत दिनों के बाद

दिल की कली खिली बहुत दिनों के बाद

क्योंकि कहने लगा ; बसंत मुझे

पतझड़ चली ,अपनी गली ,अपनी गली

महक रहा बूटा बूटा, चहक रही कली कली

आज खुद से मिल ………खूब मिली,

खुशनुमा …खुशनुमा ..बहुत दिनों के बाद

 
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Posted by on फ़रवरी 5, 2022 में poetry

 

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Santa लाया तोहफे !

Santa लाया तोहफे !

बच्चे तोहफे तो लेने के शौकीन होते हैं ..और Santa तोहफे देने का कितने खुश हैं ….. Santa ने किसी ना किसी को जरिया बनाकर उनके घर में पहुंचा दिए .बच्चे महका दिए ..बच्चे खिला दिए …. बच्चों के चेहरों पर मुस्कान लाना इबादत से कम नहीं . बच्चों की मुस्कान में खुदा ,अल्लाह, रब, christ नजर आते हैं..

 
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Posted by on दिसम्बर 25, 2021 में poetry

 

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रूहू लिखती है गीत

रूहू लिखती है गीत

हैैरान हूं आमिर खान पे
..लिखने में गाने Pk
दो बरस बिता दिये
देते गर केवल मुझे दो दिन
गीत ओर भी निखरते
धुन से सजकर अलफाज़
ओर भी महकते चहकते

 
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Posted by on दिसम्बर 10, 2021 में poetry

 

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नमन! कुदरत नमन!

नमन! कुदरत नमन!

 

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स्थति

मजबूरी नहीं मजबूती

मजबूरी नहीं मजबूती

मजदूरी मजबूरी हो सकती है …

कसरत मजबूरी नहीं मजबूती

मजबूरी नहीं आदत बनाइए

ताउम्र जश्न आनंद मनाइए

 
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Posted by on दिसम्बर 1, 2021 में healthy habits

 

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नोटबंदी का फायदा

वाह ! मोदी जी वाह, Food wastage का स्वाहा ।
शाही शादियों को चायपान आयोजन में बदल दिया ।
नोटबंदी ने देश के दिशाहीनों को सस्ती राह दिखा दी।
गरीबों की चिंताये भी मिटा दी। दुआए कबूल करो ।

 
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Posted by on नवम्बर 27, 2021 में poetry

 

गुरु भगवन

गुरु भगवन

बड़ा दयालु बड़ा कृपालु

मेरा गुरु मेरा परम भगवान

भूल जाऊं चाहे मैं नादान

वह ना भूले मेरा ध्यान

 
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Posted by on नवम्बर 18, 2021 में Dhan Dhan Guru Nanak

 

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तंदुरुस्ती की तलाश

तंदुरुस्ती की तलाश

तंदुरुस्ती पाने के लिए

स्वाद पर ताला

कसरत की माला

मन की जीत

पसीने से प्रीत

रोज की आदत

जिस्म की इबादत

 
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Posted by on नवम्बर 17, 2021 में poetry

 

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bal majburi . .

bal majburi . .

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Posted by on नवम्बर 14, 2021 में poetry

 

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भूख पर तमाचा

भूख पर तमाचा

भूख की कीमत तो भूखा जानता है

झूठन की कीमत भी भूखा ही जानता है

भरपेट थाली जिसके लिए सपना हो

जमीन हो घर बस आसमान अपना हो

कितनो का बन सकता था जो निवाला

भरे पेट वालों ने कूड़े में उसको डाला

भूख की आग सहन की ना कभी

तभी भर- भर थाली फेंक दिया सभी

मुश्किल से दावत को जोड़ा होगा धन

अन्नदाता पर ,भूख , मेहनत पर भी तमाचा है।

गरीब बाप की मजबूरी पर , मजदूरी पर भी।

 
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Posted by on नवम्बर 14, 2021 में poetry

 

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सोचने से कुछ ना होगा

सोचने से कुछ नहीं होता , मत सोचो , ना ज्यादा सोचो ज्यादा सोचने से होगा ही क्या ? चिंता चिता के समान है मानता ही नहीं सोचना है, सोचता ही रहता है ,सोचना ही चाहता है ,समाधान नहीं मिलता, नहीं मिल रहा जब तक , मन भी क्या करें ? बेचारे के सोचना ही तो बस में है। समाधान तो भगवान ही जाने ?

 
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Posted by on नवम्बर 13, 2021 में poetry

 

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हैप्पी दिले धनतेरस !

हैप्पी दिले धनतेरस !

जैसे धन कमाने के लिए बहुत बहुत मेहनत करनी पड़ती है वैसे ही पुण्य कमाने के लिए भी बहुत-बहुत शुभ काम करने पड़ते हैं यूं ही नहीं पुण्य आत्मा कहलाते तुम तिजोरी के धनी तो बहुत होते हैं मगर दिल का धनी कोई कोई होता है सीखो टाटा से, Bill Gates से

 
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Posted by on अक्टूबर 31, 2021 में # Dhanteras

 

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बेटियों का क्या कहना

बेटियों का क्या कहना


अपनेपन की ये मिठाई होती है

जानते है बेटियां पराई होती है

फिर भी दिलोजां में समाई होती है

हर दर्द की दवाई होती है

है वह बात दर्दे राज

बिन कहे जान जाती

जो लाख हमने छुपाई होती है

 

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चैट

मेहंदी तेरे नाम की

मेहंदी तेरे नाम की

यूं तो हमेशा रहे हैं तेरे रंग में

सात जन्म बिताने तेरे संग में

तेरे नाम की मेहंदी गहरी

मुश्किल से साज श्रृंगार री

हसरत आरज़ू अरमान चाहत

जिसकी कितनी हसीनाओं को

करवा चौथ पर उस नाम की मेहंदी

गुरुर ही अलग , सुरूर अलग है

दिलबर वह साजन मेरा दिलदार

जल रहा है हाय ! जमाना जालिम

देख हमारी मदहोशियां का आलम

 
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Posted by on अक्टूबर 24, 2021 में poetry

 

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बायनाः ढाई अक्षर प्रेम का काफी है

बायनाः ढाई अक्षर प्रेम का काफी है

सास भी कभी बहू ही थी

कल की बहू ,आज सासु रानी

घर घर की है यही कहानी

यह रीत तो सदियों पुरानी

करवा चौथ देखो दोनो मनाती

मेंहदी रचाती, चूड़ी खनकाती

सुहाग के गीत गाती

तारो की घनी छाँव मे

दोनों ने बड़े ही चाव मे

खाई करवे का गरी सरगी

शाम सुनाई सासु ने करवे की कहानी

बायने की थाली सजा के लाई बहूरानी

पाँव छूकर बायना देवे बहूरानी

गले लगाके बड़े आस से

बहू से यह कहा ,सास ने:

( मेरे लाल की तू लालिमा

मेरे चाँद की तू है चांदनी

उसकी मल्लिका, उसकी रानी

बायने मे चाहिए केवल ,बिटिया रानी!

बस ढाई अक्षर प्रेम के ,गृहलक्ष्मी !तू सुहानी !

ढाई अक्षर प्रेम के

ढाई अक्षर प्रेम के

काफी है ,काफी है

जिंदगी प्यार की

मुस्कान व दुलार की

काफी है, काफी है

क्योंकि (प्यार ) होता है जंहा

( मिठास )आ जाती है वंहा

प्यार ही काफी है ,काफी है।

 

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Mera chand mera dilbar

Mera chand mera dilbar

Karve.ki raat..le haath me haath
Bole sajna ..sun sujni meri baat
Tu hai Chandni mairi
Tu bole chand hu main tera
Hur burus fir chand ka didar kyu ?
Solah shingar kur bekrar kyu?
Sujni ne Sunai batia nyari
chand se  sundr sanskriti pyari
Bharat tij tyoharo ka pavan sagar
Musti Gote lagati ..Bharatiy Nari
Karva  Chauth  yaad  dilane aata
Riti- rivaj , sanskriti Mahan Humari
Tu chunda hum Chandni tumahri

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चैट

गर्दिश का राजा

गर्दिश का राजा

घोड़ा है ना गाड़ी है, ना महल ना चौबारे ना दरबान है ना पकवान है , माई रे ! न हीरे जेवरात है, # Bapu मेरा राजा ना मां मेरी रानी है ,ना सेना है ना मेवा है, काम करती थी जहां मां , ईट बजरी थी वहां, राजगद्दी उसकी बनाकर मुझे बिठा दिया, तंग कर रहा था बहुत इसलिए बहला दिया, गर्दिश के राजा का आसन सजा दिया #माई ने मेरी @ मैया मेरी ने अपने कुंवर का

 
 

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स्थति

Double Decker Sleeper

Double Decker Sleeper

नींद के लिए जरूरत होती है सुकून की ,शांति की, थकान की नाही जरूरत होती है बड़े मकान की, बड़े बेड की , बड़ी राशि की नाही मंदिर मस्जिद काशी की

 
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Posted by on अक्टूबर 20, 2021 में healthy sleep, poetry

 

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Negative bye bye

Negative bye  bye

Negative Aura को मारो धakka
Positive Aura को पा लो जaffa

 
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Posted by on अक्टूबर 18, 2021 में poetry

 

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बेटियां कराएं राज🇮🇳❤

बेटियां कराएं राज🇮🇳❤

एक बेटे से मन ना भर जब ।

दूसरे की चाह मे कर ली आठ ।

हाय ! बेटे ने सिर डाली खाक ।

बेटियों ने दिखाएं खूब ठाठ ।

 
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Posted by on अक्टूबर 18, 2021 में poetry

 

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जिंदगी जलेबी

जिंदगी जलेबी

जहां जिंदगी की जलेबी हो , वहां जलेबी कैसे खाएं ? कौन देखता है हमारी लार को हमारी मजबूरी को , बेबसी को ,बेकसी को ,पता है ना भूख का मोल हम चुका नहीं सकते और बिना मूल्य के वह हमारी भूख मिटा नहीं सकते वह भी मजबूर हैं हम भी मजबूर@ मजबूरी

 

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उलझे सूरत में

सूरत सूरत ही करते रहे

अब समझे मायने सीरत के

रूप रंग की लेते रहे बलाई

मिली उनसे हमे Bewafai

सूरत ने दिखाए दिन में तारे

सीरत वाले क्यों हमने bisare ?

 

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गैलरी

राम चाहिए# राम मंदिर नहीं

राम चाहिए# राम मंदिर नहीं

कलयुग में जगह जगह पर रावण मिल जाएंगे । बलात्कारी, हत्यारा, चोर लूटेरा ,नशे का व्यापारी बन ,कभी दहेज लोभी बन, इन रावण को मारने के लिए बहुत सारे राम चाहिए । राम मंदिर बनाने से कुछ नहीं होगा राम बनने से कुछ होगा ।बन मर्यादा पुरुषोत्तम मार दो सच्चाई के तीर से कुछ तो कम होगा कलयुग ,कुछ तो सुरक्षित रहेगी नारी ,कहीं तो सतयुग का आभास होगा ,कहीं तो रामराज्य नजर आएगा ,ना मंदिर चाहिए ,ना मस्जिद चाहिए ,ना गुरुद्वारे चाहिए ,चाहिए तो राम* चाहिए ,गोविंद चाहिए

 
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Posted by on अक्टूबर 15, 2021 में poetry

 

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दोहे की माला

दोहे की माला

गांव का सरपंच मैं , घर में रहे क्लेश

बांचे दिन रात सत्संग , मन में भरा द्वेष

 
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Posted by on अक्टूबर 12, 2021 में poetry

 

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दोहे की माला

दोहे की माला

कोयल सबकी लाडली काग किसको भाय ? सुन जे बानी दहूं की उत्तर खुद ही मिल जाए ।

 
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Posted by on अक्टूबर 7, 2021 में dohe

 

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Ae parinde kyu nahi aaya?

https://hindipoetryworld.wordpress.com/2015/03/15/ae-parinde/

 
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Posted by on अक्टूबर 6, 2021 में poetry

 

Bachelor and India

This was a big honour for my son poet Bhavya Singla presented own poetry to legend, a poet himself missileman President Abdul kalam ji at his school time at jalandhar. Only child got chance staying with Greatman throughout time he spent in jalandhar who was enjoying bachelorhood with Pm अटल ji during serving nation. Will remain in our hearts these bachelors forever.

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Posted by on अक्टूबर 5, 2021 में poetry

 

जीने का हक

जीने का हक

चाहे तो क्या नहीं कर सकती हैं बेटियां

दामन खुशियों से भर सकती हैं बेटियां

जीने का हक मांगे अपने जन्मदाता से

भाग्य लिखा कर लाती है विधाता से

छोटा सा होता है तमन्नाओं का जहान

देकर सांसों का हक भरने दो उड़ान

 
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Posted by on अक्टूबर 5, 2021 में poetry

 

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Retreat ceremony

Retreat ceremony

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Posted by on अक्टूबर 4, 2021 में poetry

 

Dosti ka dam

Dosti ka dam

दिल के रिश्ते सदा सच्चे नहीं होते

दोस्ती के रिश्ते कभी कच्चे नहीं होते

 
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Posted by on अक्टूबर 4, 2021 में poetry

 

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सच्चाई @ गांधीवाद

सच्चाई @ गांधीवाद

गांधी तेरे देश में कुर्सी की बस जंग है अपनी अपनी डफली अपने अपने रंग है नोट पर तस्वीर तेरी, दीवानी दुनिया पैसों की, जो राह दिखाई तूने उससे महल बनते नहीं। समझाएं उनको जाकर क्या ? जिनको मदिरा कुर्सी पैसा लगता अच्छा, गांधी जयंती मनाने से कुछ होने वाला नहीं ,जब तक गांधी के आदर्शों का बनेगा रखवाला नहीं ।

 
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Posted by on अक्टूबर 2, 2021 में poetry

 

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जैसा अन्न वैसा मन

जैसा अन्न वैसा मन

काटने से पहले कोई जानवर सोचना जरूर , इसमें भी सांस है , इसको भी आस है , इसको भी प्यास है जीने की, अपनी भूख के लिए किसी मासूम की बलि मत बनाओ । कुदरत ने बहुत दिया है खाने के लिए इंसान की खातिर तो फिर क्यों इंसानियत छोड़ हैवानियत का दामन थामना , क्यों ? किसी को जीते जी अपने क्षणिक स्वाद के लिए जीवन से वंचित कर देना अमानवीय है । तामसी वृत्ति को त्यागना है तो शाकाहार बनाइए क्योंकि कहते हैं (जैसा अन्न वैसा मन )

 

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Tu Hi Tu Tu Hi Tu

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