RSS

दिया बाती का मिलन

14 Nov

दिवाली की रात , सजना की बात

दिवाली की रात , कही सजना ने बात

कभी मेहमानों की सेवा , कभी पूजो गणेश देवा

बहुत ले लिए चटाके , बहुत चला लिए पटाके

बहुत मना ली लक्ष्मी रानी , सुन गृहलक्ष्मी दीवानी

बहुत जला ली दीप बाती , पढ़ अब नज़रों की पाती

पति परमेश्वर को भी आ के मनाओ तुम

अपने चुमभनो से मुँह , मीठा कराओ तुम

अपने जलवों की फुलझड़ियाँ चलाओ तुम

आओ अमावस को पूर्ण-माशी बनाये हम

तेरी रूप की चांदनी में नहाना चाहे सनम

रजनी विजय सिंगला

 
Leave a comment

Posted by on November 14, 2012 in poetry

 

thank you.

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

 
%d bloggers like this: