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सुन भाई सुन – बधाई की धुन

14 Dec

बचपन खुदाइबादत एक सी होती है

आरज़ू तमन्ना नेक सी होती है

गोद मैया की , किलकारियां भैया की

मांगे मिले बचपन दोबारा

वो खुशियों का सावन , वो शरारत का दामन

लौटा दे कोई तो , ले लूँ मैं सारा

प्यारे भैया के सेहरे की तैयारी

अनमोल रतन पे बहना बलिहारी

बधाई दे गणेशा , बधाई दे माई

बधाई लो भाई , बधाई दे साईं

शुभ मिलन बेला , आनंद सुख चैना

हर दिन होली, दीवाली हो रैना

गृहलक्ष्मी मुबारक, गौरा जैसी

बहारों का कहना , भाभी है ऐसी

सूरज से जगमग , चंदा से  उजला

मेरा भैया है ना , मंगल गाये बहना … मंगल गाये बहना …

रजनी विजय सिंगला

 
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Posted by on December 14, 2012 in poetry

 

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