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aaj ka bharat

27 Dec

aaj ka bharat

 
2 Comments

Posted by on December 27, 2013 in poetry

 

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2 responses to “aaj ka bharat

  1. Manan kumar singh

    December 31, 2013 at 9:57 AM

    गत –आगत –वार्त्तालाप
    (गत यानि साल 2013 और आगत यानि साल 2014 )
    गत : आ भई ! अब देख अपनी दुनिया । मैं तो चला। ले संभाल इस साल का नायाब तोहफा, नयी सरकार ।
    आगत : कैसा तोहफा? कैसी सरकार ?
    गत : अरे रे ! अभी से भूलना क्या ? आम जन की सरकार आ गयी , मुफ्त में पानी मिलेगा । अब देखते जा कि क्या –क्या मिलता है ? इतना ही नहीं, मैंने और भी तोहफे बख्शे हैं तुझे । मान –मर्दिताओं ने अपने मानापमान की परवाह किये बिना अपनी मान –प्रतिष्ठा की जंग छेड़ी और बड़े –बड़े ढोंगी –व्यभिचारी कारागृह पहुँच गये । डंक मारनेवाला बिच्छू भी अपनी ही डंक का शिकार हुआ । अपनी ही बिच्छू ने डंक दे डाले । हुआ न यह सब इस साल ?
    आगत : हुआ तो सब है , पर एक बात जमती नहीं । यह सरकार जो आ गयी , उसका औचित्य क्या रहा ? जिसके विरोध में चुनाव लड़े उसीके के दम पर बना ली । जिसकी कुर्सी जनता ने छीनकर बाकी दलों के हवाले की , भले ही किसी की नहीं हुई,उसी वंचित दल से समर्थन? सत्ता- च्युत दल फिर तो सरकार ही रह गया न ? जबतक चाहेगा सरकार रहेगी , नहीं चाहेगा चलती बनेगी । तो बता अब कि सरकार किसकी हुई ? जिसकी गयी उसकी या तुम कहते हो उसकी ? मेरी समझ में तो दोनों बड़े दल जनमत का संकेत समझने में चूक गये हैं । सरकार तो उन दोनों की संयुक्त होनी चाहिए थी न । हाँ , नारी –शक्ति मुखर हुई है । यह सराहनीय है।
    गत : घपले –घोटाले से भी छुटकारा हो जायेगा ।
    आगत : नये –नये आयोग और समितियाँ बन जायेंगी इसलिए ? अरे जनता का लुटा –छिपा धन फिर से राज –खजाने में वापस भी तो आना चाहिए ? मैं तो चाहूँगा कि घोटालेबाज पकड़े भी जायें और घोटाले की राशि पुनः राज –खजाने में वापस जमा भी करायी जाये । तब न जनता का कल्याण होगा । जनता को कोई क्या देगा? उसका जो है वही उसके पास रहने दो न । हो जायेगा लोक-कल्याण का काम । ये जनता के मुलाजिम अपना वेतन – मेहनताना लें बस । ये सब कब के दाता ठहरे ? जनता के मत – दान के आकांक्षी हैं ये सब । देखते नहीं , कहीं दंगा है और ये कहीं नंगा – अधनंगा होकर तेरे जाने और मेरे आने के स्वागत में मशगूल हैं सारे ।
    गत : इतना मानते हो न कि आशा-विश्वास की लाली फूट चुकी है ? अब समय की करवट तले लगता है न अत्याचार –भ्रष्टाचार कुचल जायेँगे सब?
    आगत : हाँ , हाँ । यह शुभ संदेश है ।
    ( गत –आगत एक –दूसरे को शुभकामना देकर अपनी –अपनी राह चलते बने )
    गत वर्ष की उत्कर्ष –कथा को ध्यानस्थ कर आगत (नव) वर्ष की शुभकामनाओं सहित —
    ***मनन ***

     
    • rajnivijaysingla

      January 25, 2014 at 11:55 PM

      Belated happy new year your answer lies in my poem vote bank thanks

       

thank you.

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