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नादान दोस्त निकले हम

19 Jan

हम उनकी दोस्ती को प्यार समझ बैठे
निकले नादान  कितने ? दिलदार मान बैठे
उनके दिल को अपना सामान मान बैठे
मिलन की बेसबरी उनकी तो दोस्ती थी
दीवाने हम यार ऐ दीदार उसे जान बैठे
फिकर उनके को ,दिले बेकरार मान की खता
इशके बीमार खुद ,उनको बीमार समझ बैठे
न यार मिला ,न प्यार मिला,मिला दरद
दोस्ताना अपना यूं ही तार-तार कर बैठे
कोसते है तन्हा बैठे  खुद को  अकसर हम
यूं ही दिले इकरार ,इजहारे प्यार  कर बैठे
कसूर मेरा नही खता की दिले नादान ने
जुदाई की दे सजा हमे कसूरवार मान बैठे

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2 responses to “नादान दोस्त निकले हम

  1. madhukarji50

    January 19, 2015 at 10:21 PM

    महाशय,
    भाषा की गरिमा का खयाल रखना चाहिए।

    @मनन

     

thank you.

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