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तुझसे ही जिद सीखी

05 Jun

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काटने वाले ने तो कसर न छोड़ी
पर मैं भी कम जिदी नही
जिद मुझे थी खिलने की
आसमां से मिलने की
मिटना न चाहे कोई गर
मिटाने वाला जाता है डर
ऐ मिटाने वाले ले दुआए
तू भी मेरी तरह फले फूले
दरद पाकर भी तुझसे क्यूं ?
दिल दे रहा दुआ दिलजले
कुदरत भी देगी साथ कब तक ?
कब बन जाये दरदे – अश्क जलजले ?
संभल सकता है तो संभल जा नादां
हो गई बहरी कुदरत गर पगले
दब के रह जायेंगे तेरे शिकवे – गिले

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