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सीखी भी सिखाई भी

01 Aug

दो ही बाते सीखी  बड़ो से
वो ही सिखाई छोटो को
किसी का मन न कभी दुखाओ 
दुआओ का खजाना भरते जाओ
करो भला  सदा  सभी  का
  कर सको  जितना भी किसी का
सीख चाहे है ये छोटी
पर सकून देती है बड़ा
रखती मन को है हरा

 

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3 responses to “सीखी भी सिखाई भी

  1. ajaykohli

    August 2, 2015 at 1:14 AM

    आज न रही दुआओं की बात
    न रह गए जज्बात
    आज पैसे से तोली जाती है,औकात
    बच्चे नहीं लेते अपनो,की सीख
    परायों की भाती है,उनको भीख
    पश्चिमी सभ्यता ऐसी उनको भाई
    डैड और मौम हो गए, पिता जी व माई

     
    • rajnivijaysingla

      August 2, 2015 at 10:53 AM

      दुआए अनमोल

       
      • ajaykohli

        August 2, 2015 at 2:25 PM

        धन्यवाद, अभिनंदन

         

thank you.

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