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क्या होती खुशनसीबी ?

22 Apr

दरद देखा करीब से शमशान -अस्पताल में
क्या – क्या देखा, बस कहा न जाये
भूख की आग, कहर कितना ?कैसे कैसे ढाये फैले हाथ, बिलखता बचपन, मजबुर जवानी
दुत्कारा बुढ़ापा, छुपा दरद, सिसकते साये
अश्क भी तौबा कर ले, गम इतना सताये
जहुन्नम ऐ नजारा इसी जमीं पे ही दिखाये
हर नेमत के होते जो रब को दे सौ लानते
खुशनसीबी उसकी , चौखट ही छोड़ जाये
मनजीत जगजीते ही खुशनसीब कहलाये
दरद मे करे अरदास,सुख में शुकराना गाये
खुशियां उसको खुद ही आवाज लगाये

 

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