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क्युं बोलती ये निगाहे ?

17 May

अखियां बोलती है बस पढ़ना अाना चाहिये ।
हमारी तो निगाहे ही है अाईना दिल का ।
जमाने को राज छिपाने में अाता है लुत्फ ।
हमारा तो छिपाने से उड़ जाता है लुत्फ ।
तू ही बता, जमाने! सिखा दे राज छिपाने ।
हम तो मान जाये पर न मानती ये निगाहे।
राज ऐ दिल को नजरो में दे देती ये पनाहे ।
मासूम दिल की भी न सुने ये जुल्मी निगाहे ।
कसूर निगाहो को पर पाते हैं हम सजा़ये ।

 

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