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18 May

जब तन में तकलीफ ,मन में डर समाने लगे ।
वास्तु- ज्योतिष ,दबे पांव घर मेरे में आने लगे ।
देख के टेवा उपाय कई तरह के समझाने लगे ।
दिशाहीन ? दिशाओं के मायने  समझाने लगे ।
हम भी झांसे में  रज्ज- रज्ज के आने लगे  ।
रब मान बैठे उन्हें , रब को हम भूलाने लगे ।
हिसाब से उनके ही खुद को चलाने लगे ।
नाही तन न मन मिला,बहाने वो बनाने लगे।
पैसा फूंक के भी जब हाथ न आया कुछ ।
रब से ऊंचे माने बैठे जिन्हे लगने लगे तुच्छ ।
न सुख में शुकराना दरद वेले अरदास कीती ।तांही रब ने बन पारखी, सच्चाई समझा दीती ।
परमात्म परमज्योतिष !गल्ल पल्ले पा दीती  ।

परमात्म ही परम ज्योतिष

 

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