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दरद देखा नही जाता

20 May

किसी की बदनसीबी पे ।
कमी, मजबूरी व गरीबी पे।
कभी देख के बेरोजगारी।
कभी भूख,कभी बीमारी।
कभी मौत ,  कंही सौत
तिल-तिल जीने की लाचारी ।
देख रुक जाते हैं कदम।
रोती अखियां ,हा़ए! इतने गम ।
मेरी मान, जग गमे आजाद कर।
खुशियो की तू इतनी बरसात कर ।
भीग जाये  खुदा! तेरी  खुदाई ।
मिट जाये गम,  अश्क व जुदाई

 

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