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मन बड़ा ही करता है।

04 Aug

दरद देख जहान के मन ये करता है ।

तमाम दरद मिटा दूं, मस्कानें ला दूं।

कुछ पहल भी की , मुशकिलें हल भी की ।

इल्तजा है ,आप भी जरा सोचिये

अश्क मिटाने के रास्ते खोजिये ।

कुछ कदम हम चले, कुछ चलो तुम ।

मंजिले मिल जायेगी,  यकीन है हमे ।

 गमज़दा इंतज़ार में,पाने को ऐसे लम्हे ।

 
2 Comments

Posted by on August 4, 2016 in poetry

 

2 responses to “मन बड़ा ही करता है।

  1. Krishna Chaturvedi

    August 23, 2016 at 2:02 PM

    आपकी कविता पढ़ कर इतना शकून मिला है शायद कुछ खास है
    मुश्किलों से खेल जाने का एहसास है
    आपकी इन पंक्तियों का का किस तरह से धन्यवाद दूँ

     

thank you.

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