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मजदूर हूं मजबूर नही

01 May

पापी पेट के लिए करता हूं

आज का तो हुआ इंतजाम

कल के लिए हरदम डरता हुं

तपते तन, सहमे डरे मन से

नागा कभी कभी करता हुं

भुख से करनी पड़ती मुलाकात

जाडे़ में जब -जब ठिठुरता हुं

 
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Posted by on May 1, 2018 in poetry

 

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