RSS

Category Archives: ऐ जाते हुए बरस

नये बरस पे गीत सुफियाने

नये बरस पे गीत सुफियाने

पुराने फसाने..
क्या दोहराने ?
नये गीत मीठे तराने
पिया का जिया
हम लगे बहलाने

अपना सब कुछ लगे लुटाने

पुराने फसाने..क्या दोहराने ?
नये गीत, मीठे – मीठे तराने
पिया का जिया हम लगे बहलाने

पुराने फसाने..क्या दोहराने ?
नये गीत मीठे मीठे तराने
गाये आ इश्के ऐ सूफियाने

इश्क़ न जाने दुनियादारी

नाही जाने दारु दगा बहाने

रुह तो बस रूहानियत जाने

जहान जिस्म से रहे बेगाने

इश्क़ तो बस इश्क़ पहचाने ।

मैं से तू तू तू तू हो जाने

 
 
Quote
ऐ जाते हुए बरस!

जाते हुए लम्हों को दिल देता सलामी है
रोके भी न रुके तू वक्त, बस तुझ में यह खामी है
अलविदा उन लम्हों को, उन अश्के गमों को
छीना जिसने था मेरे मन का वो चैना
आखिरी दिन तो बीता बरस तेरा
बची बस आज की ही रैना
ऐ रैना! गुजारिश तुझसे
भरदे मुस्कानों से झोली
कितने बरस आए, कितने ही बीत गए
इस बरस ही मांगी मैंने दुआ भोली
क्योंकि छोटी सी आशाए हैं
नेक इरादे हैं, पाकीज़ भाषाएं हैं
ऐ जाते हुए बरस!
तुझको तो अश्कों संग ही जिया है
सदियों से ज़्यादा ज़हर, इस बरस ही पीया है
जाते-जाते थोड़ा अमृत दे जाना
भूल गई थी हंसी, चाहते हैं अब मुस्काना
हंसना-हंसाना हमारी फितरत है
हमारी हंसी तो लौटा जाना
जी चाहे जी भर के मुस्काना
मुस्काना मुस्काना मुस्काना!

रजनी विजय सिंगला

ऐ जाते हुए बरस!

 

Tags:

 
%d bloggers like this: