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Category Archives: ममता

(बिछड़े) कभी न आन मिले!

बरसी मनाके हम तो भूल जायेंगे।

खोने वाले कभी क्या भूल पायेंगे ?

इम्तिहान ऐ जिंदगी जब आजमायेंगे।

कैसे देश गीत ये, कैसे देश प्रीत ये ?

विरासत -सियासत मे , ये पनपायेंगे ?

टूट टूट जायेंगे, ये घुट घुट जायेंगे।

स्मारक -समाधि पे शायद ये आ जायेंगे।

घुटन व टुटन से कैसे रिहाई ये पायेंगे ?

बिछड़े कभी भी नाही आन मिले ।

तिरंगे में लिपटी जब रिश्ते ऐ जान मिले।

इक बार मातमी धुन, सलामी ऐ शान मिले।

हमदर्दी तमग़ा, कभी कुछ कुछ अनुदान मिले

ताउमर उससे कैसे उनका ख़ानदान चले ???

 

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Kudrat bhi to mazhab hai..

Ram mandir banega

Par kya likhu, kyu likhu?

Konsa koi likha hua maanta hai

Dharam ka masla to aaj hal ho gya

Par jal ka masala , kaise hal hoga?

Jo haalat hai aaj jal ki,

uske bina kaise kal hoga?

Kaash jitna fikar mazhab ka hai,

utna fikar kudrat ka bhi hota

Kudrat to bhagwaan ka jeeta jaagta roop hai

Bhagwaan ko to humne dekha bhi nhi!!
Uski  fikar !Uska zikar
uski kudrat ki  fikar  kaun karega Janab ?

 

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Quote
A thought forever

I always did, I do, I will Bless for All.

Gives surity of purity beyond wall.

Reaches easily into Humanity Hall.

Meetingss with God in single call.

A thought forever

 

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अभिनंदन का अभिनंदन

अभिनंदन का अभिनंदन

 

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Vidai shiksha

 

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बेटे नही करेंगे बेड़ा पार

 

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बायनाः ढाई अक्षर प्रेम का काफी है

बायनाः ढाई अक्षर प्रेम का काफी है

सास भी कभी बहू ही थी

कल की बहू ,आज सासु रानी

घर घर की है यही कहानी

यह रीत तो सदियों पुरानी

करवा चौथ देखो दोनो मनाती

मेंहदी रचाती, चूड़ी खनकाती

सुहाग के गीत गाती

तारो की घनी छाँव मे

दोनों ने बड़े ही चाव मे

खाई करवे का गरी सरगी

शाम सुनाई सासु ने करवे की कहानी

बायने की थाली सजा के लाई बहूरानी

पाँव छूकर बायना देवे बहूरानी

गले लगाके बड़े आस से

बहू से यह कहा ,सास ने:

( मेरे लाल की तू लालिमा

मेरे चाँद की तू है चांदनी

उसकी मल्लिका, उसकी रानी

बायने मे चाहिए केवल ,बिटिया रानी!

बस ढाई अक्षर प्रेम के ,गृहलक्ष्मी !तू सुहानी !

ढाई अक्षर प्रेम के

ढाई अक्षर प्रेम के

काफी है ,काफी है

जिंदगी प्यार की

मुस्कान व दुलार की

काफी है, काफी है

क्योंकि (प्यार ) होता है जंहा

( मिठास )आ जाती है वंहा

प्यार ही काफी है ,काफी है।

 

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