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Category Archives: समाज पे कलंक

कमी की कीमत

दाने की कीमत  भूखा  ही जाने ।
प्यास की कदर, प्यासा पहचाने ।
प्यार   के क्या मोल है होता ?
दरद सहा हो , सहे हो जिसने ताने
राजसी लोग फुटपाथ से अनजाने
भरे-पूरे  क्या त्याग -रहम को  माने
वैभव तले रौंदे रोज गरीब के दाने

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पानी है तो जिंदगानी है

पानी बना नही सकता , बचा तो सकता है
जाया करने वालो को समझा तो सकता है
लातुर नही बनना,प्यास का एहसास भयंकर
बिन पानी सब सूना, नींद से जगा तो सकता है
पानी की करो निगरानी, तभी वजूद जिंदगानी वरना मिट जायेगा नामोनिशां ,हमारी कहानी
पानी संग कल है, वरना सब उन्नति विफल है

 

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क्या होती खुशनसीबी ?

दरद देखा करीब से शमशान -अस्पताल में
क्या – क्या देखा, बस कहा न जाये
भूख की आग, कहर कितना ?कैसे कैसे ढाये फैले हाथ, बिलखता बचपन, मजबुर जवानी
दुत्कारा बुढ़ापा, छुपा दरद, सिसकते साये
अश्क भी तौबा कर ले, गम इतना सताये
जहुन्नम ऐ नजारा इसी जमीं पे ही दिखाये
हर नेमत के होते जो रब को दे सौ लानते
खुशनसीबी उसकी , चौखट ही छोड़ जाये
मनजीत जगजीते ही खुशनसीब कहलाये
दरद मे करे अरदास,सुख में शुकराना गाये
खुशियां उसको खुद ही आवाज लगाये

 

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काश ! Partusha( Anandi) Sister Shivani से मिल लेती

जिंदगी का बस एक पहलू देखा
तभी तोड़ डाली खुद जीवन रेखा
Reel life की बहादुर वधु अानंदी
विदाई बेला से पहले ही विदा हो गई
आत्मबल के गीत गुणगनाने वाली
हाय ! कैसे अात्महत्या पे फिदा हो गई ?
किसी से तो कहती , अपनी मन की बात
शायद रोक लेता ,जगाकर जीवन जज़बात
बेवफाई मायने जिंदगी का अंत नही होता
हर रिश्ता -साथी , फरिश्ता या संत नही होता
काश ! Bk Sister Shivani से मिल लेती
मुरझा गई जो कली ,रुहे आनंद मे खिल लेती
झटक कमजोर पल ,रुहे कसक को छल देती
भूलके अतीत काला, खुद को उजला कल देती
Real life को भी Reel life सा ही हल देती

 

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पुण्य अपुन को पचे न यार

पुण्य से कोई नाता नही
मैं को कभी छोड़ा नही
खुदा माना खुद को सदा
खुद को खुदा से जोड़ा नही
दीनो को सताने का जूनून है
अपनी सलतन्त , अपना कानून है
रंगीनियां बिखेरती हर शै मदहोश है
पाप की जमीं ,पुण्य का किसे होश है ?

Rajni Vijay Singla

 

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रब को बना ले मितवा

रब से बड़ा  कोई मीत नही
अरदास से बेहतर गीत नही
याद तो करके देख जरा
कर देगा तुझे हरा भरा
खुदाई से उसकी प्यार कर
दिल से जरा फरियाद कर
हर रुह में  वही तो बसता है
इंसानियत हंसे तो संग हंसता है
शुभ करमन सच्ची इबादत है
बुराई का संग,खुदाये- बगावत है

Rajni Vijay Singla

 

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बेटियां रहमत रब की

बेटियां रहमत रब की
इनको न जहमत माने
ताउमर रहती अपनी
इनको न पराई जाने
पालना के पंख लगाओ
जी जान से इन्हे पढ़ाओ
बहुत चला ली ऐ ; तूने जमाने
कभी कर शोषण ,कभी दे देे ताने
अब तो कर ले ,तू भी तौबा
रब की नेमत को कर नमन !
कलियो से ही खिलता चमन
बेटियां होती दुआओं जैसी
बरकत की सदाओ जैसी
महकती दिशाओं जैसी
बेटियों से सजा लो आशियाना अपना
साकार करो मासूम अंखियों का सपना
सच्ची यही कंजक पूजा, तप ,नाम जपना

Rajni Vijay Singla

 

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