RSS

Category Archives: बुढ़ापा बड़ा बेदरद

Image

कभी याद हमे भी करना # पुलवामा

कभी याद हमे भी करना # पुलवामा

 

Tags: , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , ,

Status

Cry for life

 

Tags: , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , ,

Status

बेटे नही करेंगे बेड़ा पार

 

Tags: , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , ,

Image

काश ! भूख न होती

पापी पेट के लिए करता हूं
आज का तो हुआ इंतजाम
कल के लिए हरदम डरता हुं
तपते तन, सहमे डरे मन से
नागा कभी कभी करता हुं
भुख से करनी पड़ती मुलाकात
जाडे़ में जब -जब ठिठुरता हुं
https://hindipoetryworld.wordpress.com/2018/05/01/%e0%a4%ae%e0%a4%9c%e0%a4%a6%e0%a5%82%e0%a4%b0-%e0%a4%b9%e0%a5%82%e0%a4%82-%e0%a4%ae%e0%a4%9c%e0%a4%ac%e0%a5%82%e0%a4%b0-%e0%a4%a8%e0%a4%b9%e0%a5%80/

 

Tags: , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , ,

बायनाः ढाई अक्षर प्रेम का काफी है

बायनाः ढाई अक्षर प्रेम का काफी है

सास भी कभी बहू ही थी

कल की बहू ,आज सासु रानी

घर घर की है यही कहानी

यह रीत तो सदियों पुरानी

करवा चौथ देखो दोनो मनाती

मेंहदी रचाती, चूड़ी खनकाती

सुहाग के गीत गाती

तारो की घनी छाँव मे

दोनों ने बड़े ही चाव मे

खाई करवे का गरी सरगी

शाम सुनाई सासु ने करवे की कहानी

बायने की थाली सजा के लाई बहूरानी

पाँव छूकर बायना देवे बहूरानी

गले लगाके बड़े आस से

बहू से यह कहा ,सास ने:

( मेरे लाल की तू लालिमा

मेरे चाँद की तू है चांदनी

उसकी मल्लिका, उसकी रानी

बायने मे चाहिए केवल ,बिटिया रानी!

बस ढाई अक्षर प्रेम के ,गृहलक्ष्मी !तू सुहानी !

ढाई अक्षर प्रेम के

ढाई अक्षर प्रेम के

काफी है ,काफी है

जिंदगी प्यार की

मुस्कान व दुलार की

काफी है, काफी है

क्योंकि (प्यार ) होता है जंहा

( मिठास )आ जाती है वंहा

प्यार ही काफी है ,काफी है।

 

Tags: , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , ,

Chat

दरद देखा नही जाता

किसी की बदनसीबी पे ।
कमी, मजबूरी व गरीबी पे।
कभी देख के बेरोजगारी।
कभी भूख,कभी बीमारी।
कभी मौत ,  कंही सौत
तिल-तिल जीने की लाचारी ।
देख रुक जाते हैं कदम।
रोती अखियां ,हा़ए! इतने गम ।
मेरी मान, जग गमे आजाद कर।
खुशियो की तू इतनी बरसात कर ।
भीग जाये  खुदा! तेरी  खुदाई ।
मिट जाये गम,  अश्क व जुदाई

 

Tags: , , , , , , , , , , , , , , ,

Chat

भाभी मां मानो तो

मायके की तो बात निराली।
बेटियां होताी हैैं खुशहाली।
लेते ही सर सुहाग चुनरिया।
पराई हो जाती बाबुल अटरिया।
माना मायका मां संग भाता।
भाई-  भाभी भी मीठा नाता।
आदर देने से अटूट बन जाता।
पर मां बाप ताउमर न रहते।
भाई – भाभी ही तब साथ देते।
बेटियां रानी अपने राजा की।
भाभी मायके का नूर होती ।
भाई की वो हूर – गरुर होती।
पहल कर दो सदाये – दुआए ।
जरुरत बाद में  है जरुर होती।
जरुरत पड़े पर जो ननद बोले।
कड़वाहट रिश्तों में वो घोले।
मतलबी  फितरत की उमर छोटी ।
प्यार  उड़ा दे  वो हौले – हौले।
शुरु से रिश्ता  को मधुर बनाये ।
  दुआए देकर  ही  आती दुआए ।

 

Tags: , , , , , , , , , ,

 
%d bloggers like this: