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Category Archives: Baba Ramdev

योग कराये रुहानी संयोग

योग कराये रुहानी संयोग

युगों युगों से भी है योग पुराना ।
उमर, मज़हब ,सरहद से अनजाना
मन तन गाते एक ही तराना।
संत ऋषि तो ही योगश्वर कहलाते ।
योग के बल से परमात्म को पाते ।
योग दिवस ! बंधु आओ रोज़- रोज मनाये ।
International Yoga Day भारतीय अध्याय ।
तन को मन से, स्वास्थ्य जैसे धान्य-धन से ।
खुद को खुदा से, मालिक ऐ मन से योग जुड़ाये।

 

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बस इतना तू याद कर

 

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सूरत पे सीरत भारी

सूरत होती क्या ? जमाना जिसपे फिदा
चार दिन की चांदनी ,चार दिन की  माया
दीवानी  है दुनिया , सब को है भरमाया
सीरत को भूला जग , सूरत पे है ललचाया
न थी सूरत वैसी ,जमाना दे दाद, उस जैसी
अकसर मिलने लगे खंजर से ताने
सूरत बदलना न था हाथ में अपने
दिखा दिये रुह को सीरत के सपने
सीरत का सपना ही कर लिया साकार
मिल रहा उसी रोज से ऐ ! जमाने तेरा प्यार
तभी तो कहता है अपुन का दिल बारम्बार
सूरत न बस में तो सीरत ही बदल लो यार

 

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