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Category Archives: female foeticide

अपनों के तीर

अपनों के तीर

अपने जब दरद देते इन्तेहा
पराये तब ये कहते हंसके हम पे
बेहद नाज करते थे तुम जिन पे


आज वही जुबां खामोश रुह घायल
मन का भिगो गये कोना – कोना ।

अश्क छुपाले और छुपाले रोना

किसको दिखायेगा दरद को ढोना ?

 

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Kudrat bhi to mazhab hai..

Ram mandir banega

Par kya likhu, kyu likhu?

Konsa koi likha hua maanta hai

Dharam ka masla to aaj hal ho gya

Par jal ka masala , kaise hal hoga?

Jo haalat hai aaj jal ki,

uske bina kaise kal hoga?

Kaash jitna fikar mazhab ka hai,

utna fikar kudrat ka bhi hota

Kudrat to bhagwaan ka jeeta jaagta roop hai

Bhagwaan ko to humne dekha bhi nhi!!
Uski  fikar !Uska zikar
uski kudrat ki  fikar  kaun karega Janab ?

 

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कर लो पापियों कन्या भक्ति

 

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बस इतना तू याद कर

 

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अभिनंदन का अभिनंदन

अभिनंदन का अभिनंदन

 

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Quote

Josh Versus Jaish

जोश की उड़ी उड़ान ।

जय हिंद !जय जवान!

जोश ! तो अभी बाकी है।

ये तो बस इक झांकी है ।

ऐ तिरंगे ! हम तेरे साकी हैं।

कसमे ऐ वतन खाती खाकी है ।

रुह ऐ जिस्म भारत मां की है ।

जोशे ऐ वतन

 

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Status

Cry for life

 

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बेटे नही करेंगे बेड़ा पार

 

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तलाश में

तलाश में

 
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काश ! भूख न होती

पापी पेट के लिए करता हूं
आज का तो हुआ इंतजाम
कल के लिए हरदम डरता हुं
तपते तन, सहमे डरे मन से
नागा कभी कभी करता हुं
भुख से करनी पड़ती मुलाकात
जाडे़ में जब -जब ठिठुरता हुं
https://hindipoetryworld.wordpress.com/2018/05/01/%e0%a4%ae%e0%a4%9c%e0%a4%a6%e0%a5%82%e0%a4%b0-%e0%a4%b9%e0%a5%82%e0%a4%82-%e0%a4%ae%e0%a4%9c%e0%a4%ac%e0%a5%82%e0%a4%b0-%e0%a4%a8%e0%a4%b9%e0%a5%80/

 

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#me too as old as woman

#me too as old as woman

#|mee too issue तो है सदियो पुराना
पहले छूपा लेते थे इज्जत बचाने की खातिर
अब न रहा रावण – महिषासुरो का ज़माना
जो बन दिखाती है महाकाली रूपा शक्ति
देता ज़माना उसे नमन् ,सलामी और भक्ति

 

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बनूं कुछ ऐसा !

दरद की मिली हो जिसको सजा

बनूं उसकी मुस्कराहट की वजह

ऐ खुदा ! ऐसी ही कुछ कला दे दे

किसी की डूबी नैया लगा दूं पार

ऐसा फ़न, हौंसला ,ऐसा मल्लाह दे दे

उम्मीदें बन सकूं हर दरदे दिल की

ऐसी अदा -वफा , तू दुआ दे दे

 

मुबारक मुबारक मुबारक

मुबारक !मुबारक! मुबारक!मुबारक ।
भक्त को भगवान का दुलार मुबारक ।
भूखे को रोटी,  अधनंगे को कपड़ा
प्यासे को पानी की धार मुबारक ।
खेतों को बरखा की बहार मुबारक ।
दिल को प्यार का इज़हार मुबारक । 
सरहदों को अमन ऐ एतबार मुबारक ।
राही को मंजिल की पुकार मुबारक ।
योद्धा को धनुष – तलवार मुबारक ।
जंगलो को हरियल सा हार मुबारक ।
मुसाफिर को पेड़ की छांव मुबारक । 
भारत को स्वच्छता का पैगाम मुबारक ।
किसान को अनाज का दाम मुबारक ।
पंछी को अपना दाना-पानी मुबारक ।
बचपन को नानी की कहानी मुबारक ।
मरते को स्वस्थ जिंदगानी मुबारक ।
सुबह के भूले को  है शाम मुबारक ।
आंचल मे बेटी,  हर अंगना में पौधे ,
मां भारती को ऐसी शान मुबारक ।

 

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दरद देखा नही जाता

किसी की बदनसीबी पे ।
कमी, मजबूरी व गरीबी पे।
कभी देख के बेरोजगारी।
कभी भूख,कभी बीमारी।
कभी मौत ,  कंही सौत
तिल-तिल जीने की लाचारी ।
देख रुक जाते हैं कदम।
रोती अखियां ,हा़ए! इतने गम ।
मेरी मान, जग गमे आजाद कर।
खुशियो की तू इतनी बरसात कर ।
भीग जाये  खुदा! तेरी  खुदाई ।
मिट जाये गम,  अश्क व जुदाई

 

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सूरत पे सीरत भारी

सूरत होती क्या ? जमाना जिसपे फिदा
चार दिन की चांदनी ,चार दिन की  माया
दीवानी  है दुनिया , सब को है भरमाया
सीरत को भूला जग , सूरत पे है ललचाया
न थी सूरत वैसी ,जमाना दे दाद, उस जैसी
अकसर मिलने लगे खंजर से ताने
सूरत बदलना न था हाथ में अपने
दिखा दिये रुह को सीरत के सपने
सीरत का सपना ही कर लिया साकार
मिल रहा उसी रोज से ऐ ! जमाने तेरा प्यार
तभी तो कहता है अपुन का दिल बारम्बार
सूरत न बस में तो सीरत ही बदल लो यार

 

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