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Category Archives: morality

अपनों के तीर

अपनों के तीर

अपने जब दरद देते इन्तेहा
पराये तब ये कहते हंसके हम पे
बेहद नाज करते थे तुम जिन पे


आज वही जुबां खामोश रुह घायल
मन का भिगो गये कोना – कोना ।

अश्क छुपाले और छुपाले रोना

किसको दिखायेगा दरद को ढोना ?

 

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Valentine versus Vulgarity

Valentine versus Vulgarity
 

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नये बरस पे गीत सुफियाने

नये बरस पे गीत सुफियाने

पुराने फसाने..
क्या दोहराने ?
नये गीत मीठे तराने
पिया का जिया
हम लगे बहलाने

अपना सब कुछ लगे लुटाने

पुराने फसाने..क्या दोहराने ?
नये गीत, मीठे – मीठे तराने
पिया का जिया हम लगे बहलाने

पुराने फसाने..क्या दोहराने ?
नये गीत मीठे मीठे तराने
गाये आ इश्के ऐ सूफियाने

इश्क़ न जाने दुनियादारी

नाही जाने दारु दगा बहाने

रुह तो बस रूहानियत जाने

जहान जिस्म से रहे बेगाने

इश्क़ तो बस इश्क़ पहचाने ।

मैं से तू तू तू तू हो जाने

 
 

योग कराये रुहानी संयोग

योग कराये रुहानी संयोग

युगों युगों से भी है योग पुराना ।
उमर, मज़हब ,सरहद से अनजाना
मन तन गाते एक ही तराना।
संत ऋषि तो ही योगश्वर कहलाते ।
योग के बल से परमात्म को पाते ।
योग दिवस ! बंधु आओ रोज़- रोज मनाये ।
International Yoga Day भारतीय अध्याय ।
तन को मन से, स्वास्थ्य जैसे धान्य-धन से ।
खुद को खुदा से, मालिक ऐ मन से योग जुड़ाये।

 

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कर लो पापियों कन्या भक्ति

 

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बस इतना तू याद कर

 

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रंगे ऐ दुआऐ बेहद गहरा

रंगे ऐ दुआऐ बेहद गहरा

 

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