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Category Archives: poetry

Jungle me Amangal

Jungle me Amangal

Jungle me amangal hai

Parinde Bahut roate hai

Lupt hote Apne ghar

Chaina vo Khote hai

Kankrit Ne lute ashiane

bacho apno ki Khud hi

Vo lashe dhhote hai

Bejuban Kahe dard kis se

Bine Kante vo jo, hum bote hai

 
 

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नये बरस पे गीत सुफियाने

नये बरस पे गीत सुफियाने

पुराने फसाने..
क्या दोहराने ?
नये गीत मीठे तराने
पिया का जिया
हम लगे बहलाने

अपना सब कुछ लगे लुटाने

पुराने फसाने..क्या दोहराने ?
नये गीत, मीठे – मीठे तराने
पिया का जिया हम लगे बहलाने

पुराने फसाने..क्या दोहराने ?
नये गीत मीठे मीठे तराने
गाये आ इश्के ऐ सूफियाने

इश्क़ न जाने दुनियादारी

नाही जाने दारु दगा बहाने

रुह तो बस रूहानियत जाने

जहान जिस्म से रहे बेगाने

इश्क़ तो बस इश्क़ पहचाने ।

मैं से तू तू तू तू हो जाने

 
 

नववर्ष मुबारक मुबारक

नववर्ष  मुबारक मुबारक

सब सुखी सब सफल
शुभाशीष शुभ अटल

 
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Posted by on January 1, 2020 in poetry

 

Jinse hai Jalandhar (Rajni Vijay Singla a writer, poetess ,a blogger )

Jinse hai Jalandhar  (Rajni Vijay Singla a writer, poetess ,a blogger )
 
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Posted by on December 29, 2019 in poetry

 
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क्या इंसाफ हो गया ?

क्या इंसाफ हो गया ?

चलो मार गिराया दरिंदो को।

थम जायेगा क्या दर्दनाक सिलसिला?

वासना के वहशी परिंदो से

क्या नही अब कोई शिकवा गिला ?

युगों से घायल भटकती रूहों

को क्या इतना इंसाफ काफी है ?

बहते अश्क, बेचैन अहसास कहे

हर सजा ,कदम ,कम नाकाफी है

नोचे है जिनके अरमान तन मन

न्याय हो न सके लुटे जब आबरू धन

कोई सजा- कोई भी कानून

कोई फ़रमान, कोई भी जूनून

नाकाम है इंसाफ की कसौटी पर

कुते सा झपटा हो बोटी बोटी पर

छीना हो जिसका चैन रूहे ऐ सुकून

मुस्कान लौटायेगा क्या कोई कानून?

कालिख पोती हो चहकती ज्योति पर

खाक कर डाला ,जीते जी जला डाला

नही तालियाँ ठोक सकूंगी ऐसे इंसाफ पर

खुदा की अदालत भी कम इंसाफ के लिए

कोई राहत भी कंहा होगी घृणित पाप के लिए

कोई जल भी कंहा होगा मुक्ति शाप के लिए

न बचाव के लिए नाही सच्चे इसांफ के लिए

शिकार को तरसा दिया इक हसीन ख़्वाब के लिए

ताउम्र सिसकियां, जिल्लत भरे नकाब के लिए

इंसाफ़ के मायने क्या समझेगा गुनाहगार ?

रजनी के अपने मायने है इंसाफ के लिए।

इंसाफ अभी बहुत ज्यादा बाकी है

ये तो इक बस छोटी सी झांकी है

 

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तम्बाकू इक डाकू

 

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Kudrat bhi to mazhab hai..

Ram mandir banega

Par kya likhu, kyu likhu?

Konsa koi likha hua maanta hai

Dharam ka masla to aaj hal ho gya

Par jal ka masala , kaise hal hoga?

Jo haalat hai aaj jal ki,

uske bina kaise kal hoga?

Kaash jitna fikar mazhab ka hai,

utna fikar kudrat ka bhi hota

Kudrat to bhagwaan ka jeeta jaagta roop hai

Bhagwaan ko to humne dekha bhi nhi!!
Uski  fikar !Uska zikar
uski kudrat ki  fikar  kaun karega Janab ?

 

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