RSS

Category Archives: poetry

Limit cycle

Limit cycle
 
Leave a comment

Posted by on July 10, 2020 in poetry

 

Covid curtain

परदा है परदा
परदे के पीछे
परदानशीं हैं।

 

Tags: , ,

उम्मीदों के साये

उम्मीदों के साये

अधेरों को चीरती रोशननियां उम्मीदों को परवाज देती है ।
उमंग ,उल्लास ,सुकुन , आनंद को अपनी पहचान देती है

 
Leave a comment

Posted by on June 4, 2020 in poetry

 

Tags: , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , ,

बच के जरा बंदे

बच के जरा बंदे

आज किसी की ?
कल किसी की ?
आती रहनी बारी है ।
जात न देखे न पात।
दिन न देखे न रात ।
टाले बंदे न टले होनी।
ये तो इक महामारी है

 

Tags: ,

Happy Mothers Day Maa

Happy  Mothers Day Maa

Happy Happy Mother Day … Maa….
Meri Maa ka Aansh -Vansh barkrar rahe..
Tere dua -dular hum pe beshumar rahe..
Tera diye Hum me sda hi Sanskar rahe..
Happy Mother Day you hi bar bar kahe

 

Tags: , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , ,

ऐ कुदरत ! सब खैर कर

ऐ कुदरत  ! सब खैर कर

एे करोना इतना कहर न कर
पसीना बहा जिनका खेतों में
जीवन उनका जहर न कर
देखे फसल संग सपने जो
साकार हो, वो ढेर न कर
माना खता हुई है ,न बैर कर।

सब खैर कर, सब खैर कर

जुर्म ऐ जफा हुआ है न गैर कर।

 

Tags:

बंदे तुझे जगाने को #

ना जाने किसकी बददुआ लगी ?

हंसते गाते हुए जमाने को ।

तड़प रहा है , तड़प रहा है ।

तड़प रहा है तड़प रहा है

पिंजरे से बाहर आने गाने को ।

भूल अपनी भूलवाने  को

ना जाने किसकी बददुआ ?

कुदरत को कहर बन कर आना पड़ा

ऐ बंदे तुझे जगाने को ।

 

अन्नदाता आराध्य

अन्नदाता आराध्य

करदाता का भी अन्नदाता के बिना गुजारा नहीं।
अन्नदाता को पर कभी किसी ने क्यूं दुलारा नहीं ?

 
Leave a comment

Posted by on April 13, 2020 in poetry

 

Tags: , , , , , , , , , ,

Status

दूरी जरुरी

दूरी जरुरी

दूरियां मजबूरियां बन गई।
जिंदगी व मौत में ठन गई।

 
Leave a comment

Posted by on April 12, 2020 in poetry

 

Tags:

Pulwama

A tribute to Pulwama Martyrs

बरसी मनाके हम तो भूल जायेंगे।
खोने वाले कभी क्या भूल पायेंगे ?

 
Leave a comment

Posted by on April 5, 2020 in poetry

 

Fight against Corona

Fight against Corona
Bhaag ja CORONA
 
1 Comment

Posted by on April 3, 2020 in poetry

 

Tags: , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , ,

दुआ देते चलो।

दुआ देते चलो।

इन्तेहा दुआऐ देते रहो ।
बिना वजह ।।
बिना रिश्ते ।
बिना मतलब।
क्या पता रब ?
किसी का दर्द ऐ गम ,
आप की दुआ की वजह से
मुस्कराहट में बदल डाले ।

 

Priyanka Reddy Hydrabad

बेटियां सदा सलामत रहे
बलात्कारी बिल्कुल नही

 
Leave a comment

Posted by on February 29, 2020 in poetry

 

झाड़ू केजरीवाल की सफाईपसंद है

झाड़ू केजरीवाल की सफाईपसंद है

 

अपनों के तीर

अपनों के तीर

अपने जब दरद देते इन्तेहा
पराये तब ये कहते हंसके हम पे
बेहद नाज करते थे तुम जिन पे


आज वही जुबां खामोश रुह घायल
मन का भिगो गये कोना – कोना ।

अश्क छुपाले और छुपाले रोना

किसको दिखायेगा दरद को ढोना ?

 

Tags: , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , ,

 
%d bloggers like this: