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Category Archives: poetry

समझाया किसी ने ।

दरद देने वालों पे क्यूं आता है हमे प्यार ?

समझाया हमे किसी ने इंसानियत यही यार ।

हर मजहब की सीख ये, समय की भी पुकार ।

समझ गया जो , जीता मन , जीता सब संसार

 
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Posted by on November 7, 2016 in poetry

 

बस इतना ही जानूं !

परीत की रीत क्या होती,

न जानूं ,न पहचानूं ।

सांसे मेरी तेरे सदके ,

तुझको ही रब मानूं ।

 

 
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Posted by on October 24, 2016 in poetry

 

ओर पराई क्या करना ?

बेटियां तो होती पहले ही पराई ।

ओर पराई क्या करना ?

बैर कर कभी हुआ भला न ।

बैर बढ़ा कर क्या करना ।

परायो को अपना करने वालो !

गैर बना कर क्या करना ।

 प्यार  के सागर बन जाओ ।

ज़हर चढ़ा कर क्या करना ।

 
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Posted by on October 22, 2016 in poetry

 

काश ऐसा होता ।

इंसानियत की तलब लगा दे ।

काश ! ऐसा कोई मैखाना होता ।

कौन अपना ? कौन पराया ?

नापने का पैमाना होता ।

नफरत के सायों से दूर ।

प्यार का आशियाना होता । 

नया दौर है दहशत का।

काश दौर पुराना होता।

 
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Posted by on October 20, 2016 in poetry

 

ऐ चांद ! कहूं कुछ तुझसे ।

तेरा इंतजार भी हसीन ।

तेरा दीदार भी हसीन ।

बुरा मत मनाना चांद ।

 मेरा दिलदार भी हसीन।

मिलेगा न जवाब उस सा।

नाही आसमां नाही ज़मीन ।

पास रहके भी है पास।

दूर रहके भी वो करीब ।

 
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Posted by on October 19, 2016 in poetry

 

बेटियां साथ न छोड़े !

दुआए है बेटियां ।

सदाये है बेटियां ।

क्युं कराहे फिर भी बेटियां ।

क्यूं पाये फिर सजायें ही बेटियां  ?

 
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Posted by on October 6, 2016 in poetry

 

मन बड़ा ही करता है।

दरद देख जहान के मन ये करता है ।

तमाम दरद मिटा दूं, मस्कानें ला दूं।

कुछ पहल भी की , मुशकिलें हल भी की ।

इल्तजा है ,आप भी जरा सोचिये

अश्क मिटाने के रास्ते खोजिये ।

कुछ कदम हम चले, कुछ चलो तुम ।

मंजिले मिल जायेगी,  यकीन है हमे ।

 गमज़दा इंतज़ार में,पाने को ऐसे लम्हे ।

 
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Posted by on August 4, 2016 in poetry

 
 
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