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Category Archives: poetry

जमीन बनाम जमीर

जमीर की अनसुनी कर जमीन की आवाज सुनने वालो की नैतिकता बहरी हो जाती है
इंसानियत धुंधली हैवानियत गहरी हो जाती है

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suhagraat

Originally posted on Hindi Poetry World:

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Posted by on February 20, 2015 in poetry

 

दो शगुन दुआओं का

दुआए बेहद जरूरी है
शगुन तो इक मजबुरी है
दुआए तो उपहार है
शगुन बस इक भार है
शगुन एहसान है
दुआएं इक वरदान है
दुआ दिल की आवाज है
शगुन दिखावा बस रिवाज है
दुआए होती अमीर है
महक ऐ जामीर है
नजर चाहे आती नही
कभी जाया जाती नही
झुलो दुआऔ का पालना
रस्मे शगुन को टालना
सुधरेगा हमारा समाज
खुशियां करेगी सदा राज
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कमाल किया केजरीवाल

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केजरीवाल को बधाई
कुछ ज्यादा ही सफाई
उड़ा रहे थे जो इनके तिनके
हाए ! उड़े वही भाजपाई
झाड़ू ने की ऐसी सफाई
वक्त ऐसा किसी को न दिखाई

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कदर कुदरत की

कुदरत में दखलअंदाजी इतनी अच्छी नही
रचना है भगवान की  तुमने तो रची नही
हवा पानी करते दुृषित भक्त वो सच्चे नही
नापसंद रब को इंसान  साधक वो अच्छे नही
ईशवर खुश तब कदर कुदरत की हो अगर
सीमा गर टूटी तो टूट जाये कुदरती सबर्
अपनी धरा को परदूषण से करो बेअसर
वातावरण को करो तोहफा ये नेक नजर

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किरण vs केजरीवाल

दो बिल्लियो की लड़ाई
मोदी मिंया ने कराई
आप लहराये अपनी झाड़ू
किरण  पुकारे भाजपा आई
कमल को कीचड़ बताये
भाजपा झाड़ू के तिनके उड़ाये

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बरखा मन को भाती

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खुशियों की चाबी बरखा
बदरा चलाये पानी का चरखा
पानी की बूंदो में मजा बड़ा है
पांवो तले भी  भरा खड़ा  है
मां पकौड़े बना दो न
बदरा को भी चखा दो न
जब जब बरखा आयेगी
मां पूडे़ पकौड़े बनायेगी

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