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Category Archives: poetry

योग तराना + पावन अफसाना

योग मुबारक  योग दिवस पर
योग की महिमा गाये ज़माना
गरुर हमारा  पावन प्यारा
भारतीय परम्परा, निरोगी सितारा
मन तन विश्व का इसने संवारा
मन तन रजनी ने योग पे वारा
योग शरण में जो भी आया
खुद ब खुद ओम में समाया
विश्व बंधुत्व का भाव जगाया
योग मुबारक योगी साया

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योग है सुख संयोग

योग हमारी पुरातन परम्परा
पावन परम सहयोग
तन मन करे निरोग
खुद से मिलाये खुद को
आत्म+परमात्म  जोग
विकार छुड़ाये  त्यागे भोग

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Posted by on June 12, 2015 in poetry

 

पांव जमीं पर ही जमते

पांव जमीं पर टिकते जिनके
छूते वही आसमां को
बुलंदियो पे पहुंच कर भी
भूले न कच्चे मकान को
लंगोटिया यार, रिश्तेदार,पाठशाला
पुराने बंधन,भूले न संस्कार को
सादा खाना  सादा पाना
थामे ताउमऱ शोहरते कमान को
करम बंदगी -सादी जिंदगी़
सीख दे जाते जहान को
सलाम देती कलम रजनी की
ऐस बुलंदी  शोहरत की पहचान को

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तुझसे ही जिद सीखी

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काटने वाले ने तो कसर न छोड़ी
पर मैं भी कम जिदी नही
जिद मुझे थी खिलने की
आसमां से मिलने की
मिटना न चाहे कोई गर
मिटाने वाला जाता है डर
ऐ मिटाने वाले ले दुआए
तू भी मेरी तरह फले फूले
दरद पाकर भी तुझसे क्यूं ?
दिल दे रहा दुआ दिलजले
कुदरत भी देगी साथ कब तक ?
कब बन जाये दरदे – अश्क जलजले ?
संभल सकता है तो संभल जा नादां
हो गई बहरी कुदरत गर पगले
दब के रह जायेंगे तेरे शिकवे – गिले

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Chotti se asha

rajnivijaysingla:

धरती मां का करज उतारो
कुदरत की रोज़ आरती उतारो

Originally posted on Hindi Poetry World:

It is very heart touching poem, a ray of hope.

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Posted by on June 4, 2015 in poetry

 

मां बने मां सरस्वती जैसी

कलम तेरी ओ मां मेरी
चलते चलते क्यूं रुकी
झूकी न दरद से कभी
फिर क्यूं आज झूकी ?
फिर से मां उदार बन
फिर से जगदम्बे सी
दरद को चोट कर
खुशी की तू ओट कर
सूकुन को साकार कर
वहम को तू पार कर
जिंदगी की जंग में
हर डर को तार- तार कर
सलाम देती सांसो को
जी भर के मां तू सलाम कर
खुशी के बिछौने पे हमसे मां
ममता का इजहार कर

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Paryavaran ki Pukar…

Originally posted on Hindi Poetry World:

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Posted by on May 17, 2015 in poetry

 
 
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