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Category Archives: poetry

Armed Force Flag Day

लाखो नमन तिरंगे को
सिजदा हजारो बार है
तिरंगा है शान हमारी
वतन हमारे की पहचान है
सैनिक वारी ,होते कुरबान है
हर रंग की आभा – महिमा अपनी
अशोक चिन्ह की महान गाथा है
आन शान तिरंगे की कायम रखना
मां भारती से हर भारतीय का वादा है

Rajni Vijay Singla

 

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मान ले मेरी बात

जमीं पे रहके भी आसमांवाला मिल गया होता
जमीं वालो से ही गर बंदे तूने प्यार किया होता
नही भटकना पड़ता मंदिर मस्जिद मे तुझको
खुद मे ही खुदा को गर तलाश किया होता

Rajni Vijay Singla

 

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कलयुग में फंसे राम

सारी जिंदगी की जिसने सेवा
आज मोहताज क्यूं सेवा से
ढाकर बहू जुल्म हजारो सासू पे
मां अपनी बाबत पुछ रही देवा से
देव वो निकले  कौशल्या के राजाराम
मां केकैयी के वर पूरे करने को  त्यागा राज
चौदह बरस खुशी से भोगा वन का वास
कलयुगी बहू से क्या वह कहते ?
चुपके से निकल बहू के मंदिर से
आंसू पोंछे आंखो से लगातार बहते
मां सगी का भी सत्कार न जिस आंगन
क्या करते ? वंहा सतयुगी राम कैसे रहते ?

Rajni Vijay Singla

 

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पूरब हो या पशिचम दरद है होता

दिशाहीन जमाने हैवानियत का सफर सदा दरद ही देता है इसलिए  अपनी राहें  मानवता की ओर मोड़ ले क्योंकि प्यार बांटने से दुआऐ दस्तक देती है , बददुआऐ के बीज जहरीले ही होते हैं चाहे पूरब में उगाओ
चाहे  पशिचम में

Rajni Vijay Singla

 

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कब तक झेले खून की होली ?

कब तक बने रहेंगे गूंगे बहरे ?
हैवानियत के सहके जख्म गहरे
मासूमों के खून से खेले होली
कब तक चलेगी बारुद गोली ?
दहशतपंथी के बढ़ रहे हौंसले
बिखर रहे बेगुनाहो के घौंसले
इंसानियत होती जा रही ओझल
जाने कौन सा पल हो मौत की आंधी ?
सकून से जीना  हो गया बोझिल

Rajni Vijay Singla

 

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मन मयूरा नाचा मेरे अंगना

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Rajni Vijay Singla

 

बम नही , गम जलाये

Rajni Vijay Singla

 
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Posted by on November 10, 2015 in poetry

 
 
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