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Category Archives: sarkar

बंदे तुझे जगाने को #

ना जाने किसकी बददुआ लगी ?

हंसते गाते हुए जमाने को ।

तड़प रहा है , तड़प रहा है ।

तड़प रहा है तड़प रहा है

पिंजरे से बाहर आने गाने को ।

भूल अपनी भूलवाने  को

ना जाने किसकी बददुआ ?

कुदरत को कहर बन कर आना पड़ा

ऐ बंदे तुझे जगाने को ।

 

(बिछड़े) कभी न आन मिले!

बरसी मनाके हम तो भूल जायेंगे।

खोने वाले कभी क्या भूल पायेंगे ?

इम्तिहान ऐ जिंदगी जब आजमायेंगे।

कैसे देश गीत ये, कैसे देश प्रीत ये ?

विरासत -सियासत मे , ये पनपायेंगे ?

टूट टूट जायेंगे, ये घुट घुट जायेंगे।

स्मारक -समाधि पे शायद ये आ जायेंगे।

घुटन व टुटन से कैसे रिहाई ये पायेंगे ?

बिछड़े कभी भी नाही आन मिले ।

तिरंगे में लिपटी जब रिश्ते ऐ जान मिले।

इक बार मातमी धुन, सलामी ऐ शान मिले।

हमदर्दी तमग़ा, कभी कुछ कुछ अनुदान मिले

ताउमर उससे कैसे उनका ख़ानदान चले ???

 

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झाड़ू केजरीवाल की सफाईपसंद है

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