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Category Archives: social awareness

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#me too as old as woman

#me too as old as woman

#|mee too issue तो है सदियो पुराना
पहले छूपा लेते थे इज्जत बचाने की खातिर
अब न रहा रावण – महिषासुरो का ज़माना
जो बन दिखाती है महाकाली रूपा शक्ति
देता ज़माना उसे नमन् ,सलामी और भक्ति

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( mee too ) sunami

http://Jeevan

कभी संत छेडे़ कभी महंत

कभी नेता कभी अभिनेता

न शोहरत का कोई ख्याल

न किये का कोई मलाल

उनसे तो लाख अच्छे

कोठों के वो दलाल

संस्कारो से कोसो दूर

वासना मे जलते पुतले

महिषासुर से बदतर आसुर

नारी तूझको जागना होगा

दरिंदो को सुलाने की खातिर

बन शाश्वत महाकाली चंडी

सरेआम लगा दो फांसी बंदी

नारी तू ही है नारायणी

नारीत़्व को नमन व झंडी

कत्ल कर दो मानसिकता गंदी

 
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उफ ! ये मुस्कान तौबा

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मुस्कान की कोई उमर न होती।
न मजहब, ऱुत न कोई जात ।
मुस्कान बिखेरती मस्त बहारें ।
कशमीर  सी  कंचन कायनात ।
मुस्कान न मांगे कुबेर खजाने ।
मुस्कान के बदले बस मुस्कराहट ।

 

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बात पते की

अपनापन जता के कोई अपना नही बनता ।
वो तो सच्चाई, सादगी व संस्कार बेबस कर देते है , अपना बनाने के लिए ,ये सदगुण हैं गर तो सब जग अपना ही अपना ।

 

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मुबारक मुबारक मुबारक

मुबारक !मुबारक! मुबारक!मुबारक ।
भक्त को भगवान का दुलार मुबारक ।
भूखे को रोटी,  अधनंगे को कपड़ा
प्यासे को पानी की धार मुबारक ।
खेतों को बरखा की बहार मुबारक ।
दिल को प्यार का इज़हार मुबारक । 
सरहदों को अमन ऐ एतबार मुबारक ।
राही को मंजिल की पुकार मुबारक ।
योद्धा को धनुष – तलवार मुबारक ।
जंगलो को हरियल सा हार मुबारक ।
मुसाफिर को पेड़ की छांव मुबारक । 
भारत को स्वच्छता का पैगाम मुबारक ।
किसान को अनाज का दाम मुबारक ।
पंछी को अपना दाना-पानी मुबारक ।
बचपन को नानी की कहानी मुबारक ।
मरते को स्वस्थ जिंदगानी मुबारक ।
सुबह के भूले को  है शाम मुबारक ।
आंचल मे बेटी,  हर अंगना में पौधे ,
मां भारती को ऐसी शान मुबारक ।

 

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दरद देखा नही जाता

किसी की बदनसीबी पे ।
कमी, मजबूरी व गरीबी पे।
कभी देख के बेरोजगारी।
कभी भूख,कभी बीमारी।
कभी मौत ,  कंही सौत
तिल-तिल जीने की लाचारी ।
देख रुक जाते हैं कदम।
रोती अखियां ,हा़ए! इतने गम ।
मेरी मान, जग गमे आजाद कर।
खुशियो की तू इतनी बरसात कर ।
भीग जाये  खुदा! तेरी  खुदाई ।
मिट जाये गम,  अश्क व जुदाई

 

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जब तन में तकलीफ ,मन में डर समाने लगे ।
वास्तु- ज्योतिष ,दबे पांव घर मेरे में आने लगे ।
देख के टेवा उपाय कई तरह के समझाने लगे ।
दिशाहीन ? दिशाओं के मायने  समझाने लगे ।
हम भी झांसे में  रज्ज- रज्ज के आने लगे  ।
रब मान बैठे उन्हें , रब को हम भूलाने लगे ।
हिसाब से उनके ही खुद को चलाने लगे ।
नाही तन न मन मिला,बहाने वो बनाने लगे।
पैसा फूंक के भी जब हाथ न आया कुछ ।
रब से ऊंचे माने बैठे जिन्हे लगने लगे तुच्छ ।
न सुख में शुकराना दरद वेले अरदास कीती ।तांही रब ने बन पारखी, सच्चाई समझा दीती ।
परमात्म परमज्योतिष !गल्ल पल्ले पा दीती  ।

परमात्म ही परम ज्योतिष

 

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