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Category Archives: soliders pulvama urri

(बिछड़े) कभी न आन मिले!

बरसी मनाके हम तो भूल जायेंगे।

खोने वाले कभी क्या भूल पायेंगे ?

इम्तिहान ऐ जिंदगी जब आजमायेंगे।

कैसे देश गीत ये, कैसे देश प्रीत ये ?

विरासत -सियासत मे , ये पनपायेंगे ?

टूट टूट जायेंगे, ये घुट घुट जायेंगे।

स्मारक -समाधि पे शायद ये आ जायेंगे।

घुटन व टुटन से कैसे रिहाई ये पायेंगे ?

बिछड़े कभी भी नाही आन मिले ।

तिरंगे में लिपटी जब रिश्ते ऐ जान मिले।

इक बार मातमी धुन, सलामी ऐ शान मिले।

हमदर्दी तमग़ा, कभी कुछ कुछ अनुदान मिले

ताउमर उससे कैसे उनका ख़ानदान चले ???

 

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अपनों के तीर

अपनों के तीर

अपने जब दरद देते इन्तेहा
पराये तब ये कहते हंसके हम पे
बेहद नाज करते थे तुम जिन पे


आज वही जुबां खामोश रुह घायल
मन का भिगो गये कोना – कोना ।

अश्क छुपाले और छुपाले रोना

किसको दिखायेगा दरद को ढोना ?

 

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क्या इंसाफ हो गया ?

क्या इंसाफ हो गया ?

चलो मार गिराया दरिंदो को।

थम जायेगा क्या दर्दनाक सिलसिला?

वासना के वहशी परिंदो से

क्या नही अब कोई शिकवा गिला ?

युगों से घायल भटकती रूहों

को क्या इतना इंसाफ काफी है ?

बहते अश्क, बेचैन अहसास कहे

हर सजा ,कदम ,कम नाकाफी है

नोचे है जिनके अरमान तन मन

न्याय हो न सके लुटे जब आबरू धन

कोई सजा- कोई भी कानून

कोई फ़रमान, कोई भी जूनून

नाकाम है इंसाफ की कसौटी पर

कुते सा झपटा हो बोटी बोटी पर

छीना हो जिसका चैन रूहे ऐ सुकून

मुस्कान लौटायेगा क्या कोई कानून?

कालिख पोती हो चहकती ज्योति पर

खाक कर डाला ,जीते जी जला डाला

नही तालियाँ ठोक सकूंगी ऐसे इंसाफ पर

खुदा की अदालत भी कम इंसाफ के लिए

कोई राहत भी कंहा होगी घृणित पाप के लिए

कोई जल भी कंहा होगा मुक्ति शाप के लिए

न बचाव के लिए नाही सच्चे इसांफ के लिए

शिकार को तरसा दिया इक हसीन ख़्वाब के लिए

ताउम्र सिसकियां, जिल्लत भरे नकाब के लिए

इंसाफ़ के मायने क्या समझेगा गुनाहगार ?

रजनी के अपने मायने है इंसाफ के लिए।

इंसाफ अभी बहुत ज्यादा बाकी है

ये तो इक बस छोटी सी झांकी है

 

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बस कर जमाने ! बस

दर्द बांटने को आतुर … ….

ऐ ज़ालिम जमी ज़माने !

खुशी बांटी होती जो थोड़ी भी

तो कुछ ओर ही आलम होता ।

जमीं ही बन जाती जंहा ऐ जन्नत

खुदा भी थोड़ा बेफिक्र होता

 

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मेरा भारत महान

 

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अभिनंदन का अभिनंदन

अभिनंदन का अभिनंदन

 

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Josh Versus Jaish

जोश की उड़ी उड़ान ।

जय हिंद !जय जवान!

जोश ! तो अभी बाकी है।

ये तो बस इक झांकी है ।

ऐ तिरंगे ! हम तेरे साकी हैं।

कसमे ऐ वतन खाती खाकी है ।

रुह ऐ जिस्म भारत मां की है ।

जोशे ऐ वतन

 

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