RSS

Category Archives: terrorism

मुबारक मुबारक मुबारक

मुबारक !मुबारक! मुबारक!मुबारक ।
भक्त को भगवान का दुलार मुबारक ।
भूखे को रोटी,  अधनंगे को कपड़ा
प्यासे को पानी की धार मुबारक ।
खेतों को बरखा की बहार मुबारक ।
दिल को प्यार का इज़हार मुबारक । 
सरहदों को अमन ऐ एतबार मुबारक ।
राही को मंजिल की पुकार मुबारक ।
योद्धा को धनुष – तलवार मुबारक ।
जंगलो को हरियल सा हार मुबारक ।
मुसाफिर को पेड़ की छांव मुबारक । 
भारत को स्वच्छता का पैगाम मुबारक ।
किसान को अनाज का दाम मुबारक ।
पंछी को अपना दाना-पानी मुबारक ।
बचपन को नानी की कहानी मुबारक ।
मरते को स्वस्थ जिंदगानी मुबारक ।
सुबह के भूले को  है शाम मुबारक ।
आंचल मे बेटी,  हर अंगना में पौधे ,
मां भारती को ऐसी शान मुबारक ।

Advertisements
 

Tags: , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , ,

Chat

दरद देखा नही जाता

किसी की बदनसीबी पे ।
कमी, मजबूरी व गरीबी पे।
कभी देख के बेरोजगारी।
कभी भूख,कभी बीमारी।
कभी मौत ,  कंही सौत
तिल-तिल जीने की लाचारी ।
देख रुक जाते हैं कदम।
रोती अखियां ,हा़ए! इतने गम ।
मेरी मान, जग गमे आजाद कर।
खुशियो की तू इतनी बरसात कर ।
भीग जाये  खुदा! तेरी  खुदाई ।
मिट जाये गम,  अश्क व जुदाई

 

Tags: , , , , , , , , , , , , , , ,

Chat

बेजुबान हुं पर गुमराह नही

मेरी चुप्पी मेरी कमजोरी नही ।
मैं तो वक्त को तवज्जो देता हूं ।
दरद जमाने तेरे सारे मैं सहता हूं ।
कुछ कहना गर बस उसे कहता हूं ।
जो फैसले वक्त ही तय करता है ।
जाने बंदा उसमे क्यूं अड़ता है ?
मेरी खामोशी की वजह क्या है ?
क्योंकि जाने वो ही, रज़ा क्या है ?
बंदे की औकात कंहा न्याय सुनाने की ।
नेकी – बदी पर मुहरें अपनी लगाने की ।
कथनी-करनी के फल, रब के हाथ सारे ।
कल आज व कल , वो ! बिगाड़े या संवारे ।
नैया थमा दो उसको ,वो ही तारे वो उबारे ।
क्युं बदजुबानी ? जब वक्त जवाब दे सारे

 

Tags: , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , ,

कमी की कीमत

दाने की कीमत  भूखा  ही जाने ।
प्यास की कदर, प्यासा पहचाने ।
प्यार   के क्या मोल है होता ?
दरद सहा हो , सहे हो जिसने ताने
राजसी लोग फुटपाथ से अनजाने
भरे-पूरे  क्या त्याग -रहम को  माने
वैभव तले रौंदे रोज गरीब के दाने

 

Tags: , , , , , , , , , , , , ,

सूरत बनाम सीरत

सूरत चले जवानी तक सीरत चले बाद भी
मोम सा दिल बना ले याद रखे फौलाद भी

 

Tags: , , , , , ,

मां के क्या कहने, रब्बा !

मा की क्या रीस करेगा तू जमाने।
मां ही तो दे सांसो के खजाने।
दरद करती सब अपने हिस्से।
इतिहास गवाह है, महान है किस्से ।
मां तो बस देना ही देना जाने ।
औलाद की खातिर सह ले ताने ।
दरद में भी रहकर , है दुआए देती ।
औलाद के खंजर ,चुपचाप है सहती।
ममता का मोती ,शीतल सी ज्योति
बालक कलयुगी हो जाये कितने बेशक
मां सदा पावनी सतयुगी गंगा सी बहती

 

Tags: , , , , , , , , , , , , , ,

दरद से निजात

खुदा ही केवल दरद से निजात दे सकता है
दुआए ,दरद को काफी हद कम कर सकती है
खुदा की बंदगी,, बंदे को हौंसले दे सकती है खुदा के इंसाफ में बस विश्वास बनाये रखे
दरद रफ्ता-रफ्ता रफूचक्कर हो ही जायेगा
खुदा के बेहद करीब ले जायेगा तोहे बंदे
खुद ब खुद छुट जायेगे माड़े सब धंधे

 

Tags: , , , , , , , , , , , , , , , , , , ,

 
%d bloggers like this: