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Tag Archives: कर लो पापियों कन्या भक्ति

अपनों के तीर

अपनों के तीर

अपने जब दरद देते इन्तेहा
पराये तब ये कहते हंसके हम पे
बेहद नाज करते थे तुम जिन पे


आज वही जुबां खामोश रुह घायल
मन का भिगो गये कोना – कोना ।

अश्क छुपाले और छुपाले रोना

किसको दिखायेगा दरद को ढोना ?

 

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बेटे नही करेंगे बेड़ा पार

 

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मुरादों का मेला

मां बैठी है भर के झोली
मुरादों से भर लो भक्तों

मुरादो का है मेला
भक्तों का है रेला
मां की है रहमत
संभाले सब झमेला

मां ही साथी दिन राती

मां ही है सखी सहेला

मैया दे ममता के साये

रहने न दे कभी अकेला

 

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गऊ समान कन्या

नवरात्रा के उपलक्ष्य में बेटियाँ बचाने की शपथ ही सच्चा पूजन है .

करते है जिसकी डोली विदा, रक्त उस का बहाना न चाहिए

कन्या तो गऊ समान है, वध उस का करना न चाहिए

तुम भी तो किसी की  बेटी हो, फिर क्यों सुख की तुम सांस भरो ?

छीन सांसें बेटी के हक की, पाप सर पे चढ़ाना न चाहिए

करते है जिसकी डोली विदा, लहू उस का बहाना न चाहिए

ज़रा सोच करो द्रिष्टि धर के, न काटो सृष्टि को जड़ से

कर कन्या हत्या-एक नीच कर्म, जन्म अपना गवाना न चाहिए

पढले बेटी तभी चेहरा, बेटी हर मन की बात सुने

चले वंश बस बेटे से, इस भ्रम में आना न चाहिए

करते है जिसकी डोली विदा, रक्त उस का बहाना न चाहिए

बेशक न जिमाओ, तुम कंजक, न पूजो चाहे कोई देवी

अपने घर आती कन्या को, मृत्युद्वार दिखाना न चाहिए

करते है जिसकी डोली विदा, लहू उसका बहाना न चाहिए . .

रजनी विजय सिंगला, यह गुज़ारिश करती है . .

 
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Posted by on October 21, 2012 in poetry

 

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कर लो पापियों कन्या भक्ति . .

 

 

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कर लो पापियों कन्या भागती

 
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Posted by on October 18, 2012 in poetry

 

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