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Tag Archives: डर

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बात पते की

अपनापन जता के कोई अपना नही बनता ।
वो तो सच्चाई, सादगी व संस्कार बेबस कर देते है , अपना बनाने के लिए ,ये सदगुण हैं गर तो सब जग अपना ही अपना ।

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मां बने मां सरस्वती जैसी

कलम तेरी ओ मां मेरी
चलते चलते क्यूं रुकी
झूकी न दरद से कभी
फिर क्यूं आज झूकी ?
फिर से मां उदार बन
फिर से जगदम्बे सी
दरद को चोट कर
खुशी की तू ओट कर
सूकुन को साकार कर
वहम को तू पार कर
जिंदगी की जंग में
हर डर को तार- तार कर
सलाम देती सांसो को
जी भर के मां तू सलाम कर
खुशी के बिछौने पे हमसे मां
ममता का इजहार कर

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