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Tag Archives: परदेस

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काश ! भूख न होती

पापी पेट के लिए करता हूं
आज का तो हुआ इंतजाम
कल के लिए हरदम डरता हुं
तपते तन, सहमे डरे मन से
नागा कभी कभी करता हुं
भुख से करनी पड़ती मुलाकात
जाडे़ में जब -जब ठिठुरता हुं
https://hindipoetryworld.wordpress.com/2018/05/01/%e0%a4%ae%e0%a4%9c%e0%a4%a6%e0%a5%82%e0%a4%b0-%e0%a4%b9%e0%a5%82%e0%a4%82-%e0%a4%ae%e0%a4%9c%e0%a4%ac%e0%a5%82%e0%a4%b0-%e0%a4%a8%e0%a4%b9%e0%a5%80/

 

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क्युं बोलती ये निगाहे ?

अखियां बोलती है बस पढ़ना अाना चाहिये ।
हमारी तो निगाहे ही है अाईना दिल का ।
जमाने को राज छिपाने में अाता है लुत्फ ।
हमारा तो छिपाने से उड़ जाता है लुत्फ ।
तू ही बता, जमाने! सिखा दे राज छिपाने ।
हम तो मान जाये पर न मानती ये निगाहे।
राज ऐ दिल को नजरो में दे देती ये पनाहे ।
मासूम दिल की भी न सुने ये जुल्मी निगाहे ।
कसूर निगाहो को पर पाते हैं हम सजा़ये ।

 

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