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Tag Archives: भंडारे

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काश ! भूख न होती

पापी पेट के लिए करता हूं
आज का तो हुआ इंतजाम
कल के लिए हरदम डरता हुं
तपते तन, सहमे डरे मन से
नागा कभी कभी करता हुं
भुख से करनी पड़ती मुलाकात
जाडे़ में जब -जब ठिठुरता हुं
https://hindipoetryworld.wordpress.com/2018/05/01/%e0%a4%ae%e0%a4%9c%e0%a4%a6%e0%a5%82%e0%a4%b0-%e0%a4%b9%e0%a5%82%e0%a4%82-%e0%a4%ae%e0%a4%9c%e0%a4%ac%e0%a5%82%e0%a4%b0-%e0%a4%a8%e0%a4%b9%e0%a5%80/

 

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मुरादों का मेला

मां बैठी है भर के झोली
मुरादों से भर लो भक्तों

मुरादो का है मेला
भक्तों का है रेला
मां की है रहमत
संभाले सब झमेला

मां ही साथी दिन राती

मां ही है सखी सहेला

मैया दे ममता के साये

रहने न दे कभी अकेला

 

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तेरी याद ने बना दी ज़िंदगी

जब लबो पे तेरा नाम आ गया
रूह को सुकून ,चैन,आराम  आ गया
तेरी याद से मुस्कान  जो आई
दिले बेकरारी गुमशुदा हो गई
छलके जो अश्क थे वो खुशी के
दरद की रात  जेसै जुदा  हो गई
मैं मैं न रहा, तू ही तू हो गया
सांस सांस मेरी खुदा हो गई
जिंदगी मेरी हसीन दुआ हो गई
मुशिकलें  सारी धुंआ -धुंआ हो गई

Rajni Vijay Singla

 

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