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Tag Archives: भारत

कमी की कीमत

दाने की कीमत  भूखा  ही जाने ।
प्यास की कदर, प्यासा पहचाने ।
प्यार   के क्या मोल है होता ?
दरद सहा हो , सहे हो जिसने ताने
राजसी लोग फुटपाथ से अनजाने
भरे-पूरे  क्या त्याग -रहम को  माने
वैभव तले रौंदे रोज गरीब के दाने

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हाय रुलाया प्याजों ने

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यह  कैसी आजादी

महंगाई ने की बर्बादी

प्याज आसमान पे पंहुचा

गरीब ने  अपना पेट  नोचा

अमीर भरे lockers में

गरीब रोटी की ठोकरों में

प्याज सोने के भाव हुआ

पेट भरना हराम हुआ

Blackmailers’ का काम हुआ

वतन फिर बदनाम हुआ

मेहमान न आये घर कोई

गरीब करे बस यही दुआ

रजनी विजय सिंगला

Email: rajnivijaysingla@gmail.com

 
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Posted by on August 14, 2013 in message, poetry

 

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