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Tag Archives: मदर डे

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काश ! भूख न होती

पापी पेट के लिए करता हूं
आज का तो हुआ इंतजाम
कल के लिए हरदम डरता हुं
तपते तन, सहमे डरे मन से
नागा कभी कभी करता हुं
भुख से करनी पड़ती मुलाकात
जाडे़ में जब -जब ठिठुरता हुं
https://hindipoetryworld.wordpress.com/2018/05/01/%e0%a4%ae%e0%a4%9c%e0%a4%a6%e0%a5%82%e0%a4%b0-%e0%a4%b9%e0%a5%82%e0%a4%82-%e0%a4%ae%e0%a4%9c%e0%a4%ac%e0%a5%82%e0%a4%b0-%e0%a4%a8%e0%a4%b9%e0%a5%80/

 

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मां की दुआए कबूल कर दे

  दरद के पहाड़ सब पल में ही तू धूल  कर दे ।
चुभने से पहले ही हर शूल को तू फूल कर दे।
बुलंदियो में, हे रब्बा ! बच्चे  तू मशगूल कर दे।
हर तमन्ना ,हर दुआ, हर  मां की कबूल कर दे ।
उनकी मासूम गलतियां भूलने की भूल कर दे ।
मदर डे पे, खुदा खुद को इतना मशहूर कर दे ।

 

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मां की दुआए कबूल कर ले

  दरद के सब पहाड़ पल में ही तू धूल  कर दे ।
चुभने से पहले ही हर शूल को तू फूल कर दे।
बुलंदियो में, हे रब्बा ! बच्चे  तू मशगूल कर दे।
हर तमन्ना ,हर दुआ, हर  मां की कबूल कर दे ।
उनकी मासूम गलतियां भूलने की भूल कर दे ।
मदर डे पे, मां सा ही खुद को मशहूर कर दे ।

 

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