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Tag Archives: मौत

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काश ! भूख न होती

पापी पेट के लिए करता हूं
आज का तो हुआ इंतजाम
कल के लिए हरदम डरता हुं
तपते तन, सहमे डरे मन से
नागा कभी कभी करता हुं
भुख से करनी पड़ती मुलाकात
जाडे़ में जब -जब ठिठुरता हुं
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काश! न झेलते हम वो अभाव

ताउमर गुजार दी बदहाली में
रईसी होते भी कंगाली में
बुढ़ापा गुजारेंगे नवाबो सा
पर सांसो को जल्दी थी बड़ी टूटने की
बेसबरी थी रुह को तन से छुटने की
सपने हमारे नवाबी ,जमीं पे ही रह गये
ले अभावों की अस्थिया गंगाजल में बह गये
अच्छा कल आस में ,जुल्मे अरमान सह गये

Rajni Vijay Singla

 

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कुदरत कहर सपने ढेर

अपने छुटे सपने टूटे
छुटा घर व गांव
कुदरत के दांव अागे
चली न बंदे तेरी चाल
मंसूबे सारे धरे रह गये
कुदरतआगे क्या मजाल ?
परदूषण कब तक सहती
कुदरत जवाब यूं ही देती
अब भी संभल जा,मानव बदल जा
कुदरत को कुछ तो संभाल
बदल तरीके बेढंगी चाल
ऊपर वाले को पल न लगता
चलने में इक उलटी चाल

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