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Tag Archives: सुख- दुख

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काश ! भूख न होती

पापी पेट के लिए करता हूं
आज का तो हुआ इंतजाम
कल के लिए हरदम डरता हुं
तपते तन, सहमे डरे मन से
नागा कभी कभी करता हुं
भुख से करनी पड़ती मुलाकात
जाडे़ में जब -जब ठिठुरता हुं
https://hindipoetryworld.wordpress.com/2018/05/01/%e0%a4%ae%e0%a4%9c%e0%a4%a6%e0%a5%82%e0%a4%b0-%e0%a4%b9%e0%a5%82%e0%a4%82-%e0%a4%ae%e0%a4%9c%e0%a4%ac%e0%a5%82%e0%a4%b0-%e0%a4%a8%e0%a4%b9%e0%a5%80/

 

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क्या होती खुशनसीबी ?

दरद देखा करीब से शमशान -अस्पताल में
क्या – क्या देखा, बस कहा न जाये
भूख की आग, कहर कितना ?कैसे कैसे ढाये फैले हाथ, बिलखता बचपन, मजबुर जवानी
दुत्कारा बुढ़ापा, छुपा दरद, सिसकते साये
अश्क भी तौबा कर ले, गम इतना सताये
जहुन्नम ऐ नजारा इसी जमीं पे ही दिखाये
हर नेमत के होते जो रब को दे सौ लानते
खुशनसीबी उसकी , चौखट ही छोड़ जाये
मनजीत जगजीते ही खुशनसीब कहलाये
दरद मे करे अरदास,सुख में शुकराना गाये
खुशियां उसको खुद ही आवाज लगाये

 

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