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Tag Archives: 14 Nov

Valentine versus Vulgarity

Valentine versus Vulgarity
 

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काश ! भूख न होती

पापी पेट के लिए करता हूं
आज का तो हुआ इंतजाम
कल के लिए हरदम डरता हुं
तपते तन, सहमे डरे मन से
नागा कभी कभी करता हुं
भुख से करनी पड़ती मुलाकात
जाडे़ में जब -जब ठिठुरता हुं
https://hindipoetryworld.wordpress.com/2018/05/01/%e0%a4%ae%e0%a4%9c%e0%a4%a6%e0%a5%82%e0%a4%b0-%e0%a4%b9%e0%a5%82%e0%a4%82-%e0%a4%ae%e0%a4%9c%e0%a4%ac%e0%a5%82%e0%a4%b0-%e0%a4%a8%e0%a4%b9%e0%a5%80/

 

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कब तक झेले खून की होली ?

कब तक बने रहेंगे गूंगे बहरे ?
हैवानियत के सहके जख्म गहरे
मासूमों के खून से खेले होली
कब तक चलेगी बारुद गोली ?
दहशतपंथी के बढ़ रहे हौंसले
बिखर रहे बेगुनाहो के घौंसले
इंसानियत होती जा रही ओझल
जाने कौन सा पल हो मौत की आंधी ?
सकून से जीना  हो गया बोझिल

Rajni Vijay Singla

 

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