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Tag Archives: a wish

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मां की दुआए कबूल कर दे

  दरद के पहाड़ सब पल में ही तू धूल  कर दे ।
चुभने से पहले ही हर शूल को तू फूल कर दे।
बुलंदियो में, हे रब्बा ! बच्चे  तू मशगूल कर दे।
हर तमन्ना ,हर दुआ, हर  मां की कबूल कर दे ।
उनकी मासूम गलतियां भूलने की भूल कर दे ।
मदर डे पे, खुदा खुद को इतना मशहूर कर दे ।

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मां की दुआए कबूल कर ले

  दरद के सब पहाड़ पल में ही तू धूल  कर दे ।
चुभने से पहले ही हर शूल को तू फूल कर दे।
बुलंदियो में, हे रब्बा ! बच्चे  तू मशगूल कर दे।
हर तमन्ना ,हर दुआ, हर  मां की कबूल कर दे ।
उनकी मासूम गलतियां भूलने की भूल कर दे ।
मदर डे पे, मां सा ही खुद को मशहूर कर दे ।

 

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चलना जरुरी

चलेगें हम जितना ज्यादा
होगा उतना हमको फायदा
न छूयेगी पायेगी बीमारी हमको
न ही तन की लाचारी हमको
कर लो खुद से पक्का वायदा
अटूट संकल्प, अचल इरादा

 

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Merry Christmas बोले Radhekrishna

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हम तो तेरे रंग में रंग गये Santa
रंग जा  तु भी हमारे रंग में
हंस के मनाये उत्सव सारे
क्या रखा मजहब ऐ जंग में
इक जोत से हम सब  रोशन
क्युं न चले फिर संग में ?

 

Rajni Vijay Singla

 

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Merry Christmas बोले Radhekrishna

 

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क्या महफूज़ आज भी दामिनयो का दामन ?

दामिनयों का दामन आज भी न महफूज़ क्यूं?
अस्मत पे नापाक निगाहे, पाप की भूख क्यूं ?
तीन बरस बाद भी सिलसिले वही बरकरार है
रोज नई दामिनी सिसकती,हो रहा तिरस्कार है
नाबालिगी  ठप्पे से उड़ने को तैयार दरिंदा वह
इंसानियत का शिकारी क्यूं  आजाद परिंदा वह
हैवानियत में मसरुफ ,शिकार की आस में
कानून बेबस मजबूर, हदों की फांस में
मोमबतियां  जलाने से न तुफान बुझ पायेंगे
रुकेंगे तभी , वहशी सरेआम फांसी  खायेंगे
पाप कानून से बड़ा क्यूं ?
न्याय  चुपचाप खड़ा क्यूं ?
रब के इंसाफ पे बस बचा एतबार है
ओर बड़े दरदेमंजर का शायद इंतजार है
तभी बेहद बेबस कानून है
न्याय डाले बैठा हथियार है

Rajni Vijay Singla

 

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सूफी की परिभाषा

सूफी गीत मायने जब  नयन बरसे
तू ही तू बस तेरे  ही चरचे
आवाज बजाये इश्क का साज
आशिकी पे हो बेहद नाज
सूफी रीत माने जब रुह हरषे
परमात्म परीत को आत्म तरसे
पावन हो जाये पाप के डर से
खुदा सखा अपना ,अनमोल सकून
रब की  आरजू ,अरमाने जूनून

Rajni Vijay Singla

 

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