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Merry Christmas बोले Radhekrishna

 

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क्या महफूज़ आज भी दामिनयो का दामन ?

दामिनयों का दामन आज भी न महफूज़ क्यूं?
अस्मत पे नापाक निगाहे, पाप की भूख क्यूं ?
तीन बरस बाद भी सिलसिले वही बरकरार है
रोज नई दामिनी सिसकती,हो रहा तिरस्कार है
नाबालिगी  ठप्पे से उड़ने को तैयार दरिंदा वह
इंसानियत का शिकारी क्यूं  आजाद परिंदा वह
हैवानियत में मसरुफ ,शिकार की आस में
कानून बेबस मजबूर, हदों की फांस में
मोमबतियां  जलाने से न तुफान बुझ पायेंगे
रुकेंगे तभी , वहशी सरेआम फांसी  खायेंगे
पाप कानून से बड़ा क्यूं ?
न्याय  चुपचाप खड़ा क्यूं ?
रब के इंसाफ पे बस बचा एतबार है
ओर बड़े दरदेमंजर का शायद इंतजार है
तभी बेहद बेबस कानून है
न्याय डाले बैठा हथियार है

Rajni Vijay Singla

 

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भारतीय कला कमाल है

<a href="https://hindipoetryworld.files.wordpress.com/2015/11/

मन में घर करती कलाये
शिंगार कीआवाज ये अदाये
सरहदे भी करती सिजदा
कला की न होती सीमाऐ
मजहब से न कोई वास्ता
खुद ढूंढ लेती अपना रास्ता
मै दीवानी खुद कला की
जिसने नवाजी कलाकारी हमको
करु इबादत उस नूरेअल्लाह की

Rajni Vijay Singla

 

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Innovative India ! Handy cooler

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Happy Indian with his innovation
Necessity gives such motivation
Salute ! creativity ; such passion
Poverty friendly such information

Rajni Vijay Singla

 

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हाए ? कंजकों से बलात्कार राम तेरे दरबार

ये कैसे नवराते ?
ये कैसी रामलीला ?
पावन कंजक अकेली
रावणो  का कबीला
कंहा छुपी थी जगदम्बे ?
कंहा राम के हनुमान ?
अस्मत छलनी छलनी हो गई
खतरे में  है इंसानियत
खतरे में है जिस्मोजान
संस्कार सब ओझल हुए
रोती  मां भारती देख अपनी संतान

Rajni Vijay Singla

 

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World mental health day ( दुआए )

दुआए दे हंसी की
मन की खुशी की
सोचो से छूटकारा हो
हर पल उजियारा हो
मुस्कानो की उडारी हो
उमंगो की खुमारी  हो
नींद मीठी प्यारी हो
बेबसी न, लाचारी हो
दुआए पूरी सारी हो

Rajni Vijay Singla

 

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मोहम्मद रफी( मुस्कराता सरगम )

दम भरते जिसके आगे गीत है
करे चाकरी सुर संगीत है
सुर का शंहशाह -मुरीद कौन है वो
आवाज अमर,  सांसे मौन है वो
शोखी हो चाहे अदा हो कोई
रुमानियत रहमत वफा हो पिरोई
हर सांचे में ढल जाता  है वो
अपने गीतों में  आज भी मुस्कराता वो
सुर सरताज मोहम्मद रफ़ी  कहाता वो
सुरे खनक से मन खनक जाता है तू वो
तेरी आवाज के लिए अलफाज कंहा ?
(जो तुझमे) ओरो में वो बात कंहा !

 

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