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Tag Archives: Abdul Kalam

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वतनपरस्ती से इंसानियत लाज़मी

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मानव ऊंचा धरम से नही
शुभ करम से  होता है
हैवान ही  आतंकवाद  बोता है
  बेकार के मसलों को रोता है
  Sir Abdul Kalam ji  
पे उंगली उठाने वाले
ही वतन के  है गदार
Kalam ji  तो सादगी
मानवता के  थे अवतार   
बजरंगी भाईजान से सबक ले
इंसानियत वतनपरस्ती से सदैव ऊंची
आलोचना की बजाय लो मानवता में रुचि

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पांव जमीं पर ही जमते

पांव जमीं पर टिकते जिनके
छूते वही आसमां को
बुलंदियो पे पहुंच कर भी
भूले न कच्चे मकान को
लंगोटिया यार, रिश्तेदार,पाठशाला
पुराने बंधन,भूले न संस्कार को
सादा खाना  सादा पाना
थामे ताउमऱ शोहरते कमान को
करम बंदगी -सादी जिंदगी़
सीख दे जाते जहान को
सलाम देती कलम रजनी की
ऐस बुलंदी  शोहरत की पहचान को

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PRIDE OF NATION: Dr. APJ ABDUL KALAM JI

This Poem was written by Rajni Vijay Singla and my son, Bhavya Singla presented it personally to Dr. APJ Abdul Kalam Ji. This was very well appreciated by him and he took away the Poems.

pride of nation

 
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Posted by on September 25, 2012 in poetry

 

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