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Tag Archives: brahamkumaris

राजयोग मुबारक योगी तोहे

जब जब निहारूं सांस में अपनी
हो जाये योगी मेरी आत्म
दूर नही बस दूर नही
पास मेरे है मेरा परमात्म
जो मेरे करीब है सबसे
कितनी दूर था मैं उससे
जबसे मिला मैं ही खुद से
अकसर मुलाकात होती रहती उससे
राजयोग हमे मनजीते बनना सिखाता
आत्म का परमात्म से अटूट नाता

Rajni Vijay Singla

 

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हाय रुलाया प्याजों ने

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यह  कैसी आजादी

महंगाई ने की बर्बादी

प्याज आसमान पे पंहुचा

गरीब ने  अपना पेट  नोचा

अमीर भरे lockers में

गरीब रोटी की ठोकरों में

प्याज सोने के भाव हुआ

पेट भरना हराम हुआ

Blackmailers’ का काम हुआ

वतन फिर बदनाम हुआ

मेहमान न आये घर कोई

गरीब करे बस यही दुआ

रजनी विजय सिंगला

Email: rajnivijaysingla@gmail.com

 
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Posted by on August 14, 2013 in message, poetry

 

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कर लो पापियों – कन्या भक्ति

kar lo papiyoon

 
 

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