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Tag Archives: crime

जिस तन लागे वो तन जाने भूख ( world Food Day )

गरीब के लिए रोटी इक सपना
बरखा जाड़े में तन अपना ढकना
अमीरो के तो भंडार भरे है
कुते भी  रज्जे पड़े है
भूखे बेबस उनके फैंके टुकड़ो की आस में
कब से जूठन की इंतजार में
मजबूरी के दरबार में
लम्बी लम्बी कतार में
पेट की अगन की खातिरॉ
जग में भरे पड़े है

Rajni Vijay Singla

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Prosperity is Modi

Need of progress and prosperity means Modi Ji need wishes for great victory to make India a golden sparrow again.

 
 

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world population day

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Posted by on July 11, 2013 in poetry

 

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दामिनी की दुहाई

 

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बापू के आजादे हिन्द की सिसकती तस्वीर देखो

कहीं कोख में मौत, बुझाए दहेज़ बलात्कार जीवन जोत

देवियों का देश महान , हाय ! बेटियों की तकदीर देखो

करे फ़रियाद आज दामिनी गाँधी नेहरु से

टपकता दर्दे लहू बापू, आखिरी रूहे तहरीर देखो

कितने अरमानो से रखा था नाम दामिनी मेरा

वतन अपने में हुआ दमन मैला, आबरू पे चली शमशीर देखो

आसमान था सपना मेरा, ना हुआ अपना मेरा

किया बेरंग-बेनूर ऐसा , मट्टी में मिलाया नसीब देखो

बहाने चाहे थे बैठ डोली में आंसू ,आंसुओ की चढ़ाया मुझे सलीब देखो

तमन्ना फूलों की , जीने की चाह थी

कसूर निकली सड़क पे , तैयार अर्थी मेरी वहा थी

उफ़ कितनी थी बदनसीब देखो

दुहाई दे बेटी हिन्द की, लूटते मुग़ल-अंग्रेज़, तो ना होता बेआबरू ! वतन तेरा

उड़ाई धज्जियां जब आबरू-ए-वतन की, आज़ाद दरिंदो ने

लगी बापू तेरी संस्कृति, कितनी गरीब देखो

कानून की आड़ तले , दब जाएगी कहीं आह मेरी

माँ भारती तभी तो मांगे संस्कारो की भीख देखो

पाई जो वेदना मेरे अपनों ने , वैसी ना कोई और पाए

अलविदा दोस्तों ! जाने से मेरे शायद मानवता जग जाए

कुर्बानी को मेरी लगा के केवल नारे, यूं ही ना जाया करना

आत्म-दीप जला के संस्कारो के, उजालों का साया करना

 

रजनी विजय सिंगला

Email: rajnivijaysingla@gmail.com

 
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Posted by on December 30, 2012 in message

 

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आबरू : इतनी सस्ती ??

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Posted by on December 23, 2012 in message

 

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मलाला : और चाहिए

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विश्व मलाला दिवस

मलाला : और चाहिए

“इंशाल्लाह कितना मासूम चेहरा जैसे किरणों का बसेरा

उम्र छोटी इरादे बड़े  तभी मशालेजीत लिए कारवाँ  पीछे खड़े”

मलाला ने शैतानी इरादों पर मलाल जब किया

सुलगते दरिंदो ने मानवता पर वार तब किया

बेताब रूह-मलाला, आरज़ू रिहाई वतन दकियानूसी ज़ंजीरो से

मौत को पछाड़ा कैसे दुआओं ने कमाल वो किया

सहम गए शिकारी भी, अभिव्यक्ति को मसीहा बना डाला

मिटानी चाही थी एक, पैदा हो गयी कितनी मलाला

नादान थे न-मालूम, मारने वाले से बचाने वाला बड़ा होता है

इंसानियत के पुजारियो संग , अल्लाह खुद खड़ा होता है

रजनी विजय सिंगला

E-mail- rajnivijaysingla@gmail.com

 
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Posted by on November 10, 2012 in poetry

 

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Gandhian Appeal

gandhian appeal

 
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Posted by on October 2, 2012 in poetry

 

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