RSS

Tag Archives: gandhi

Chat

सूरत पे सीरत भारी

सूरत होती क्या ? जमाना जिसपे फिदा
चार दिन की चांदनी ,चार दिन की  माया
दीवानी  है दुनिया , सब को है भरमाया
सीरत को भूला जग , सूरत पे है ललचाया
न थी सूरत वैसी ,जमाना दे दाद, उस जैसी
अकसर मिलने लगे खंजर से ताने
सूरत बदलना न था हाथ में अपने
दिखा दिये रुह को सीरत के सपने
सीरत का सपना ही कर लिया साकार
मिल रहा उसी रोज से ऐ ! जमाने तेरा प्यार
तभी तो कहता है अपुन का दिल बारम्बार
सूरत न बस में तो सीरत ही बदल लो यार

Advertisements
 

Tags: , , , , , , , , , , ,

पांव जमीं पर ही जमते

पांव जमीं पर टिकते जिनके
छूते वही आसमां को
बुलंदियो पे पहुंच कर भी
भूले न कच्चे मकान को
लंगोटिया यार, रिश्तेदार,पाठशाला
पुराने बंधन,भूले न संस्कार को
सादा खाना  सादा पाना
थामे ताउमऱ शोहरते कमान को
करम बंदगी -सादी जिंदगी़
सीख दे जाते जहान को
सलाम देती कलम रजनी की
ऐस बुलंदी  शोहरत की पहचान को

Posted from WordPress for Android

 

Tags: , , , , , , , , , , , , , , ,

राम नाम से तो डर

नाम लेता लगाता संग जिस राम का

उस मर्यादापुरषोतम के नाम से तो डर

द्रोपदी की लाज बचाई जिसने

उस अर्जुनसारथी घनशाम से तो डर

इंसान रूप, मगर मारे डंक है तु

संतो की पावन धरा पे, कलंक है तु

कब्र मे पांव तेरे, दिल मे वासना के डेरे

बापू बना फिरता, आस्था के शाप से तो डर

शाम होने को जिंदगी की तेरी

मौत की काली छावं से तो डर

मिटी ना अब तक तेरी मैं मैं

अहंकारी रावण के अंजाम से तो डर

होता कौन तु भक्तों को ज़न्नत देने वाला

ओ पापी ज़रा जहन्नुम के इंतकाम से तो डर

दुहाई देता फिरे किन शुभकर्मन की तु

अब जरा दुष्कर्म के दुष्परिणाम से  तु डर

बहुत चढ़ ली श्रदा की चोटिया तुने

अब जरा वक्त के उतराव से तु डर  

 

रजनी विजय सिंगला

Email: rajnivijaysingla@gmail.com

 

 
Leave a comment

Posted by on September 7, 2013 in poetry

 

Tags: , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , ,

Image

aaj ka bhisham pitameh

aaj ka bhisham pitameh

 
Leave a comment

Posted by on May 9, 2013 in poetry

 

Tags: , , , , , , , , , , , , , , , , ,

Image

Gandhian Appeal

gandhian appeal

 
Leave a comment

Posted by on October 2, 2012 in poetry

 

Tags: , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , ,