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Tag Archives: KRISHNA

राम नाम से तो डर

नाम लेता लगाता संग जिस राम का

उस मर्यादापुरषोतम के नाम से तो डर

द्रोपदी की लाज बचाई जिसने

उस अर्जुनसारथी घनशाम से तो डर

इंसान रूप, मगर मारे डंक है तु

संतो की पावन धरा पे, कलंक है तु

कब्र मे पांव तेरे, दिल मे वासना के डेरे

बापू बना फिरता, आस्था के शाप से तो डर

शाम होने को जिंदगी की तेरी

मौत की काली छावं से तो डर

मिटी ना अब तक तेरी मैं मैं

अहंकारी रावण के अंजाम से तो डर

होता कौन तु भक्तों को ज़न्नत देने वाला

ओ पापी ज़रा जहन्नुम के इंतकाम से तो डर

दुहाई देता फिरे किन शुभकर्मन की तु

अब जरा दुष्कर्म के दुष्परिणाम से  तु डर

बहुत चढ़ ली श्रदा की चोटिया तुने

अब जरा वक्त के उतराव से तु डर  

 

रजनी विजय सिंगला

Email: rajnivijaysingla@gmail.com

 

 
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Posted by on September 7, 2013 in poetry

 

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Aaj Ka Bharat

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Posted by on July 7, 2013 in poetry

 

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सुन भाई सुन – बधाई की धुन

बचपन खुदाइबादत एक सी होती है

आरज़ू तमन्ना नेक सी होती है

गोद मैया की , किलकारियां भैया की

मांगे मिले बचपन दोबारा

वो खुशियों का सावन , वो शरारत का दामन

लौटा दे कोई तो , ले लूँ मैं सारा

प्यारे भैया के सेहरे की तैयारी

अनमोल रतन पे बहना बलिहारी

बधाई दे गणेशा , बधाई दे माई

बधाई लो भाई , बधाई दे साईं

शुभ मिलन बेला , आनंद सुख चैना

हर दिन होली, दीवाली हो रैना

गृहलक्ष्मी मुबारक, गौरा जैसी

बहारों का कहना , भाभी है ऐसी

सूरज से जगमग , चंदा से  उजला

मेरा भैया है ना , मंगल गाये बहना … मंगल गाये बहना …

रजनी विजय सिंगला

 
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Posted by on December 14, 2012 in poetry

 

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मलाला : और चाहिए

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विश्व मलाला दिवस

मलाला : और चाहिए

“इंशाल्लाह कितना मासूम चेहरा जैसे किरणों का बसेरा

उम्र छोटी इरादे बड़े  तभी मशालेजीत लिए कारवाँ  पीछे खड़े”

मलाला ने शैतानी इरादों पर मलाल जब किया

सुलगते दरिंदो ने मानवता पर वार तब किया

बेताब रूह-मलाला, आरज़ू रिहाई वतन दकियानूसी ज़ंजीरो से

मौत को पछाड़ा कैसे दुआओं ने कमाल वो किया

सहम गए शिकारी भी, अभिव्यक्ति को मसीहा बना डाला

मिटानी चाही थी एक, पैदा हो गयी कितनी मलाला

नादान थे न-मालूम, मारने वाले से बचाने वाला बड़ा होता है

इंसानियत के पुजारियो संग , अल्लाह खुद खड़ा होता है

रजनी विजय सिंगला

E-mail- rajnivijaysingla@gmail.com

 
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Posted by on November 10, 2012 in poetry

 

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Rajesh Khanna: dis-tribute . . .

 
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Posted by on July 25, 2012 in poetry

 

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WAQT BHE CHAH BHE

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WRITTEN BY MY SON, BHAVYA SINGLA. PUBLISHED IN MANY NATIONAL AND INTERNATIONAL MAGAZINES LIKE VAMA & CHALLANGE AND NEWSPAPERS TOO.

 
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Posted by on June 3, 2012 in poetry

 

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