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Tag Archives: poem in hinhi

ताज किसका ?

ताज किसका ?

ताजमहल बनवा इतराते है जो लोग

कारीगरों के हाथ कटवाते है जो लोग

बुलन्दियो पे अपनी इतराते है जो लोग

माटी में इक दिन मिल जाते है वो लोग

बेबसी पे दुसरो की मुस्कराते है जो लोग

अभिमान का लग जाता है उनको रोग

खुदा भी नही खाता रहम उनपे ज़रा भी

खुदा के दर पे रहम को गीड़गीड़ाते है वो लोग

 

रजनी विजय सिंगला 

 
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Posted by on August 5, 2013 in poetry

 

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