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Tag Archives: RAJNI VIJAY SINGLA

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वो बचपन प्यारा

आजकल कपड़े के थेलै में साग सब्जी व कागज के लिफाफे में समोसे – जलेबी पाकर बचपन फिर  से  लौट आया ।
Welcome Ecofriendly !
Polybags free, Jalandhar

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मां की दुआए कबूल कर दे

  दरद के पहाड़ सब पल में ही तू धूल  कर दे ।
चुभने से पहले ही हर शूल को तू फूल कर दे।
बुलंदियो में, हे रब्बा ! बच्चे  तू मशगूल कर दे।
हर तमन्ना ,हर दुआ, हर  मां की कबूल कर दे ।
उनकी मासूम गलतियां भूलने की भूल कर दे ।
मदर डे पे, खुदा खुद को इतना मशहूर कर दे ।

 

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मां की दुआए कबूल कर ले

  दरद के सब पहाड़ पल में ही तू धूल  कर दे ।
चुभने से पहले ही हर शूल को तू फूल कर दे।
बुलंदियो में, हे रब्बा ! बच्चे  तू मशगूल कर दे।
हर तमन्ना ,हर दुआ, हर  मां की कबूल कर दे ।
उनकी मासूम गलतियां भूलने की भूल कर दे ।
मदर डे पे, मां सा ही खुद को मशहूर कर दे ।

 

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Maa Mai aur Bitiya

 

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Quote

Uphar ki diary .. prerna ki kalam mein..
Na jane kya jadu kar dala…
Aanadi maa ko de kar honsla..
Banwa dali geeton ki lambi mala..
Shikriya bhavya shivangi ..
Meri aankhon ka ho ujala..

Uphar ki diary …

 
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Posted by on May 4, 2014 in poetry

 

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शिव महिमा

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Posted by on February 7, 2014 in poetry

 

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राम नाम से तो डर

नाम लेता लगाता संग जिस राम का

उस मर्यादापुरषोतम के नाम से तो डर

द्रोपदी की लाज बचाई जिसने

उस अर्जुनसारथी घनशाम से तो डर

इंसान रूप, मगर मारे डंक है तु

संतो की पावन धरा पे, कलंक है तु

कब्र मे पांव तेरे, दिल मे वासना के डेरे

बापू बना फिरता, आस्था के शाप से तो डर

शाम होने को जिंदगी की तेरी

मौत की काली छावं से तो डर

मिटी ना अब तक तेरी मैं मैं

अहंकारी रावण के अंजाम से तो डर

होता कौन तु भक्तों को ज़न्नत देने वाला

ओ पापी ज़रा जहन्नुम के इंतकाम से तो डर

दुहाई देता फिरे किन शुभकर्मन की तु

अब जरा दुष्कर्म के दुष्परिणाम से  तु डर

बहुत चढ़ ली श्रदा की चोटिया तुने

अब जरा वक्त के उतराव से तु डर  

 

रजनी विजय सिंगला

Email: rajnivijaysingla@gmail.com

 

 
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Posted by on September 7, 2013 in poetry

 

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