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Tag Archives: rajnivijaysingla

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बेजुबान हुं पर गुमराह नही

मेरी चुप्पी मेरी कमजोरी नही ।
मैं तो वक्त को तवज्जो देता हूं ।
दरद जमाने तेरे सारे मैं सहता हूं ।
कुछ कहना गर बस उसे कहता हूं ।
जो फैसले वक्त ही तय करता है ।
जाने बंदा उसमे क्यूं अड़ता है ?
मेरी खामोशी की वजह क्या है ?
क्योंकि जाने वो ही, रज़ा क्या है ?
बंदे की औकात कंहा न्याय सुनाने की ।
नेकी – बदी पर मुहरें अपनी लगाने की ।
कथनी-करनी के फल, रब के हाथ सारे ।
कल आज व कल , वो ! बिगाड़े या संवारे ।
नैया थमा दो उसको ,वो ही तारे वो उबारे ।
क्युं बदजुबानी ? जब वक्त जवाब दे सारे

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गुलामी को सलामी

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Posted by on October 1, 2013 in poetry

 

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अंगदान दिव्यदान [world organ donation day]

अंगदान : दिव्यदान [world organ donation day]

अंगदानियो की कितनो को ज़रूरत

अंगदान  का बंदे कब होगा मुहूर्त

अंगदान का प्रण तु ले ले

पुण्यकर्म का फल तु ले ले

आत्मा अमर है, यह सच है माना

मौत बाद जिंदगी हसीन तराना

मौत के बाद जो होना राख है

किसी के लिए नूर, जो होना खाक  है

नेक काम में कैसी देरी ?

उजालो से भर दे बेबसी अंधेरी

तेरी नींद किसी की जाग है

अंगदान का संकल्प पाक है

रजनी विजय सिंगला 

 
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Posted by on August 7, 2013 in poetry

 

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tourism v/s pollution

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Posted by on July 3, 2013 in poetry

 

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tere sitam ya mere karm ?

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Posted by on June 27, 2013 in poetry

 

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Titli Rani

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Posted by on June 15, 2013 in poetry

 

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Aside

Imageram rahkar

ram rahkar

 
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Posted by on June 7, 2013 in poetry

 

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