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Tag Archives: ram

राम नाम से तो डर

नाम लेता लगाता संग जिस राम का

उस मर्यादापुरषोतम के नाम से तो डर

द्रोपदी की लाज बचाई जिसने

उस अर्जुनसारथी घनशाम से तो डर

इंसान रूप, मगर मारे डंक है तु

संतो की पावन धरा पे, कलंक है तु

कब्र मे पांव तेरे, दिल मे वासना के डेरे

बापू बना फिरता, आस्था के शाप से तो डर

शाम होने को जिंदगी की तेरी

मौत की काली छावं से तो डर

मिटी ना अब तक तेरी मैं मैं

अहंकारी रावण के अंजाम से तो डर

होता कौन तु भक्तों को ज़न्नत देने वाला

ओ पापी ज़रा जहन्नुम के इंतकाम से तो डर

दुहाई देता फिरे किन शुभकर्मन की तु

अब जरा दुष्कर्म के दुष्परिणाम से  तु डर

बहुत चढ़ ली श्रदा की चोटिया तुने

अब जरा वक्त के उतराव से तु डर  

 

रजनी विजय सिंगला

Email: rajnivijaysingla@gmail.com

 

 
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Posted by on September 7, 2013 in poetry

 

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कुकर्मी संत की रासलीला

कहाँ मर्यादा पुर्शोतम राम

कहाँ बापू आसाराम

राम नाम को किया बदनाम

रावन से भे बदतर काम

बलात्कार कर सत्संग करे

आत्म आवाज़ को भंग करे

बलात्कार के बाद नातिन कहे

रहें सहे संस्कार वो भे बहे

चेले चपेटे लाखों में

पट्टी बांधें आँखों पे

पापी को बापू कहे नादान भूलो में

बलात्कारी आहंकारी बापू झूलो में

शिकारी बेबस अकेली शूलों में

कानून करे बुलंद आवाज़

बलात्कार से मुक्त करे समाज

शिकार को नहीं शिकारी को मारे

नारी को नहीं बलात्कारी को मारें

रजनी विजय सिंगला

 
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Posted by on August 26, 2013 in message, poetry

 

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Ed mubarak

Prem hai bhasha, shanti hai reeti
Badhai behad saral aur seedhi
Mubarak Ed mubarak Eidi
Ed ka chanda, ruh hai roshan
Nas nas mein neki, bhaichara poshan
Ekta ka ho har sach sapna
Neeli chhatri wala apna
Humko rachta humme basta
Secularism ho nara apna
Non violence ho sitara apna
Ram Rahim jo je chahe japle
Ek noor hai malik apna

 
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Posted by on August 9, 2013 in message

 

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varkish hi vardaan

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Posted by on June 13, 2013 in poetry

 

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