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मलाला : और चाहिए

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विश्व मलाला दिवस

मलाला : और चाहिए

“इंशाल्लाह कितना मासूम चेहरा जैसे किरणों का बसेरा

उम्र छोटी इरादे बड़े  तभी मशालेजीत लिए कारवाँ  पीछे खड़े”

मलाला ने शैतानी इरादों पर मलाल जब किया

सुलगते दरिंदो ने मानवता पर वार तब किया

बेताब रूह-मलाला, आरज़ू रिहाई वतन दकियानूसी ज़ंजीरो से

मौत को पछाड़ा कैसे दुआओं ने कमाल वो किया

सहम गए शिकारी भी, अभिव्यक्ति को मसीहा बना डाला

मिटानी चाही थी एक, पैदा हो गयी कितनी मलाला

नादान थे न-मालूम, मारने वाले से बचाने वाला बड़ा होता है

इंसानियत के पुजारियो संग , अल्लाह खुद खड़ा होता है

रजनी विजय सिंगला

E-mail- rajnivijaysingla@gmail.com

 
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Posted by on November 10, 2012 in poetry

 

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